जेवर-दनकौर में ओलावृष्टि का कहर: नोएडा और ग्रेटर नोएडा में शुक्रवार शाम अचानक मौसम बदल गया। तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने जहाँ लोगों को गर्मी से राहत दी, वहीं किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं।
दनकौर-जेवर के देहाती इलाकों में सबसे ज़्यादा नुकसान
ओलावृष्टि का असर सबसे ज्यादा दनकौर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में देखने को मिला, जहाँ खेतों में खड़ी गेहूं की फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। कई खेतों में फसल पूरी तरह जमीन पर गिर गई, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। इस समय देहात क्षेत्र में गेहूं की फसल की कटाई चल रही है यानी यह आपदा ऐन उस वक्त आई जब अन्नदाता अपनी मेहनत का फल समेटने की तैयारी में था।
पूरे यूपी-NCR में तबाही का मंजर
यह समस्या केवल जेवर तक सीमित नहीं है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल पूरी तरह भीग गई, जिससे दाने काले पड़ने लगे हैं और गुणवत्ता भी खराब हो गई है। तेज हवाओं व बारिश के कारण फसल जमीन पर गिर गई, जिससे कटाई में भी दिक्कतें आ रही हैं। एक किसान ने बताया “इस बार सोचा था बेटी की शादी अच्छे से होगी, लेकिन अब घर का खर्च चलाना मुश्किल है। फसल बर्बाद हो गई, कर्ज सिर पर है। हर साल मौसम कुछ न कुछ नुकसान कर देता है, लेकिन इस बार तो पूरी तरह टूट गए हैं।”
4-5 अप्रैल को फिर अलर्ट
कृषि वैज्ञानिकों द्वारा 4 और 5 अप्रैल को दी गई पुनः बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। गेहूं की फसल को बर्बादी से बचाने के लिए किसानों ने खेतों में थ्रेसरिंग का काम युद्ध स्तर पर तेज कर दिया है। गांवों में स्थिति यह है कि थ्रेसर मशीनों की भारी मांग के चलते किसानों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
किसानों की माँगें
पककर तैयार गेहूं की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। लगातार प्राकृतिक मार झेल रहे किसान पूरी तरह टूट चुके हैं। किसान संगठनों ने जिला प्रशासन से माँग की है कि तत्काल सर्वे (गिरदावरी) कराई जाए और प्रति एकड़ उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही फसल बीमा का लाभ जल्द से जल्द दिलाया जाए।
सरकार का रुख
केंद्र सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जहाँ भी तेज बारिश या ओलावृष्टि से फसलें प्रभावित हुई हैं, वहाँ तुरंत क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट के ज़रिए नुकसान का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाए और राहत प्रक्रिया समयबद्ध हो। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसान अभी भी प्रशासनिक कार्रवाई का इंतज़ार कर रहे हैं। यह प्रकृति की मार महज एक मौसमी घटना नहीं यह उस अन्नदाता की पीड़ा है जो साल भर मेहनत करके फसल उगाता है, और फिर कटाई के ऐन वक्त बेबस होकर अपने खेत को तबाह होते देखता है।

