ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो DPR रद्द: ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों निवासियों का मेट्रो का सपना एक बार फिर फाइलों में उलझ गया। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो की संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि यह एक स्वतंत्र रिपोर्ट नहीं है बल्कि पुरानी डीपीआर को ही संशोधित कर दोबारा भेजा गया था, जो स्वीकार्य नहीं है। इस खबर के सामने आते ही NEFOWA (नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन) के नेतृत्व में सैकड़ों निवासी सड़कों पर उतर आए।
रस्सी से खींचा मेट्रो पिलर अनूठा प्रतीकात्मक प्रदर्शन
सेक्टर-71 चौराहे के पास नोएडा एक्सटेंशन की दिशा में खड़े अंतिम मेट्रो पिलर के समीप यह प्रदर्शन आयोजित किया गया। गुस्साए निवासियों ने एक मोटी रस्सी से मेट्रो पिलर को “खींचने” का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया मानो वे मेट्रो को खुद नोएडा एक्सटेंशन तक खींच लाना चाहते हों। केंद्र और राज्य सरकार दोनों के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी हुई।
नेताओं की आवाज़
NEFOWA अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने कहा “ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। डीपीआर की बार-बार अस्वीकृति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। लाखों लोगों की रोज़मर्रा की तकलीफों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।” NOVRA के अध्यक्ष रंजन तोमर ने कहा कि शहरी निवासी हों या पास के गाँव के लोग — सभी सार्वजनिक परिवहन की कमी से पीड़ित हैं।
डीपीआर अटकने की असली कहानी
यह परियोजना मूल रूप से 16 स्टेशनों के गलियारे के रूप में प्रस्तावित थी और राज्य कैबिनेट से मंज़ूरी भी मिल चुकी थी। बाद में नमो भारत (RRTS) के मार्ग से टकराव के कारण इसे घटाकर 5 स्टेशनों तक सीमित कर दिया गया। केंद्र ने स्पष्ट कर दिया है कि संशोधित परियोजना के लिए बिल्कुल नई डीपीआर बनानी होगी जिसमें नई योजना, तकनीकी मूल्यांकन और राज्य कैबिनेट की मंज़ूरी सब फिर से लेनी होगी। नए प्रस्तावित स्टेशन हैं सेक्टर-61, सेक्टर-70, सेक्टर-122, सेक्टर-123 और सेक्टर-4 (किसान चौक, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के पास)। हालाँकि सेक्टर-122 को संशोधित डीपीआर से बाहर किए जाने पर पहले से ही भारी नाराज़गी है, जो हज़ारों निवासियों को प्रभावित करती है।
रियल एस्टेट पर असर
मेट्रो परियोजना क्षेत्र में रियल एस्टेट विकास का सबसे बड़ा आधार रही है। पहले की घोषणाओं से खरीदारों की रुचि और संपत्ति के मूल्य बढ़े थे, लेकिन लगातार देरी से माँग प्रभावित हो रही है और डेवलपर्स भी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
26 अप्रैल को जंतर-मंतर पर महाप्रदर्शन
निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि मेट्रो परियोजना को जल्द मंज़ूरी नहीं मिली और काम शुरू नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज होगा। 26 अप्रैल को जंतर-मंतर पर एक बड़े प्रदर्शन की घोषणा की गई है, जिसमें हज़ारों निवासियों के भाग लेने की उम्मीद है। दस साल से ज़्यादा समय से मेट्रो का इंतज़ार कर रहे ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों का धैर्य अब टूटता नज़र आ रहा है। सवाल यह है कि आखिर कब तक चलेगा यह फाइलों का चक्कर?

