घटना कैसे हुई? शुक्रवार शाम करीब 4 बजे अदनान अपने बड़े भाई जुनैद के साथ घर से महज 20 मीटर दूर बह रही गंग नहर के किनारे खेल रहा था। नहर में एक नारियल तैरता दिखाई दिया तो दोनों भाई उसे पकड़ने पानी में उतर गए। बड़े भाई जुनैद किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन चार साल के अदनान का पैर फिसल गया और तेज बहाव में वह बह गया। परिवार को सूचना मिलते ही पुलिस को फोन किया गया।
रेस्क्यू ऑपरेशन का अपडेट शनिवार सुबह से एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें विशेष उपकरणों के साथ मैदान में उतरीं। रविवार को टीमों ने 14 किमी दूर बांजरपुर गांव तक तलाश की। दनकौर कोतवाली प्रभारी मुनेंद्र सिंह ने बताया, “बचाव टीमें पूरी मुस्तैदी से काम कर रही हैं। गोताखोर और नावें लगातार नहर के गहरे हिस्सों में खोज रही हैं।” सोमवार को भी सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा। परिवार का आरोप है कि शुरुआत में रेस्क्यू में काफी देरी हुई और नहर का पानी कम नहीं कराया गया। परिवार और गांव की व्यथा अदनान मजदूर इसरार और गुलफसा का सबसे छोटा बेटा था। परिवार में एक बड़ा भाई जुनैद और एक छोटी बहन भी है। पिता इसरार ने कहा, “अगर प्रशासन तुरंत सक्रिय होता तो मेरा बेटा बच सकता था।” मां गुलफसा और पूरे परिवार के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। गांव के लोग बच्चे के सुरक्षित लौटने की दुआ कर रहे हैं।
सुरक्षा की लापरवाही उजागर ग्रामीणों ने बताया कि गंग नहर आबादी के बीच से गुजरती है, लेकिन किनारे न फेंसिंग है, न दीवार, न चेतावनी बोर्ड। लंबे समय से सुरक्षा इंतजामों की मांग की जा रही थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। करीब 8 साल पहले भी इसी गांव में 6 वर्षीय फरमान नामक बच्चे का नारियल पकड़ते समय इसी नहर में हादसा हुआ था और उसका शव भी आज तक नहीं मिला। इस घटना ने पुरानी यादें ताजा कर दी हैं और लोगों में आक्रोश है।

