Greater Noida Authority News: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ही नही बल्कि सभी प्राधिकरण में आजकल जांच हो रही है कि जिन उद्यमियों ने प्लांट आवंटित कराए थे और उस पर काम शुरू नही किया है। अब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने ऐसे 13 आवंटियों के भूखंड रद्द कर दिए हैं। नए सिरे से इन भूखंडों का आवंटन करेगा। शर्त यही रहेगी कि आवंटन के बाद तय समय-सीमा में उद्योग शुरू करना होगा।
2007 और 2008 में हुए थे आवंटित
प्राधिकरण के एक अफसर ने बताया कि 2007 और 2008 के दौरान इन 13 भूखंड के आवंटन अलग-अलग सेक्टर में किए गए थे। लीज डीड और कब्जा देने की प्रक्रिया भी पूरी कराई जा चुकी है। काफी साल गुजरने के बाद इन आवंटियों को फंक्शनल करने के नोटिस भेजे गए मगर उन्होंने कई जवाब नही दिया। बावजूद इसके भी यहां काम शुरू नहीं कराया गया। अधिकांश पर निर्माण तक पूरे नहीं किए गए। ऐसे में यह माना गया है कि इन भूखंडों की जरूरत इन आवंटियों को नहीं है। अब नए उद्यमियों को भूखंड आवंटित कर दिए जाएंगे। जो पैसा जमा है। वह भी तयशुदा ब्याज सहित वापस कर दिया जाएगा। सीईओ एनजी रवि कुमार ने उद्योग विभाग को यह भी आदेश दिया है कि ऐसे सभी आवंटियों पर कार्रवाई करें जो यूनिट को फंक्शनल नहीं कर रहे हैं। इससे शासन की मंशा के मुताबिक रोजगार सृजन और क्रियाशील उद्योग का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पा रहा है। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि आंतरिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस तरह के भूखंड कुछ लोगों ने बेहतरीन रिटर्न की उम्मीद में खरीदे थे लेकिन आवंटियों को भी समझने की जरूरत है कि प्राधिकरण से आवंटित भूखंड केवल उद्योगों की जरूरत को पूरा करने के लिए हैं। उन्हें अनिश्चितकालीन समय के लिए खाली नहीं छोड़ा जा सकता है।
144 भूखंडों पर लटकी है कैंसिल होने की तलवार
बता दें कि आवंटन के बाद से यूनिट फंक्शनल नहीं कराने पर 144 औद्योगिक भूखंड की सूची प्राधिकरण ने बनाई है। इसमें अधिकांश भूखंड पर निर्माण पूरा कर उद्योग शुरू ही नहीं हुआ। कुछ मामलों में खानापूर्ति के लिए उद्योग शुरू हुए लेकिन बाद के सर्वे में इनके बंद होने की जानकारी प्राधिकरण को मिली। यह भूखंड ईकोटेक-1, ईकोटेक-2, ईकोटेक-3, ईकोटेक-6, ईकोटेक-12 में आवंटित हुए। यह भूखंड टॉय सिटी, उद्योग विहार आदि में भी आवंटित किए गए हैं। प्राधिकरण अब इन सब पर जल्द ही कार्रवाई करने जा रहा है।

