Ghooskhor Pandat Controversy: मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर FIR दर्ज, योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कार्रवाई, ब्राह्मण समाज की भावनाएं आहत करने का आरोप

Ghooskhor Pandat Controversy: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लखनऊ के हजरतगंज थाने में नेटफ्लिक्स की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के निर्माताओं और टीम के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। फिल्म के टाइटल को ब्राह्मण समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए यह कार्रवाई की गई है। पुलिस का कहना है कि फिल्म की सामग्री से सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका की जा रही है।

फिल्म में मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका में हैं, जहां वे एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी अजय दीक्षित का किरदार निभा रहे हैं, जिसका उपनाम ‘पंडत’ है। फिल्म की कहानी एक रात में घटित होती है और इसमें नुशरत भरुचा व साकिब सलीम भी अहम भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म नीरज पांडे द्वारा प्रोड्यूस की गई है, जबकि निर्देशन रितेश शाह ने किया है।

विवाद तब शुरू हुआ जब फिल्म का टीजर हाल ही में नेटफ्लिक्स के 2026 स्लेट इवेंट में रिलीज किया गया। टाइटल में ‘घूसखोर’ (रिश्वतखोर) शब्द को ‘पंडत’ के साथ जोड़ने पर सोशल मीडिया और कुछ संगठनों ने कड़ा विरोध जताया था। आरोप लगाया गया कि इससे ब्राह्मण समुदाय को अपमानित किया जा रहा है। इससे पहले मुंबई के एक वकील ने नेटफ्लिक्स और निर्माताओं को लीगल नोटिस भेजा था, जिसमें टाइटल बदलने की मांग की गई थी।

FIR दर्ज होने के बाद निर्देशक-निर्माता नीरज पांडे ने बयान जारी करते हुए कहा, “यह एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और ‘पंडत’ सिर्फ एक किरदार का बोलचाल का नाम है। कहानी किसी व्यक्ति के कार्यों और चुनावों पर केंद्रित है, न कि किसी जाति, धर्म या समुदाय पर टिप्पणी करती है। हम अपनी जिम्मेदारी समझते हैं।”

पांडे ने आगे कहा कि लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए सभी प्रमोशनल सामग्री को फिलहाल हटा लिया गया है। “हम चाहते हैं कि दर्शक पूरी फिल्म देखकर उसका संदर्भ समझें, न कि आंशिक झलकियों से निर्णय लें।” इसके बाद नेटफ्लिक्स ने सोशल मीडिया से टीजर पोस्ट भी डिलीट कर दी है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश पर कई शिकायतों के बाद यह FIR दर्ज की गई। मामले में फिल्म के निर्देशक, निर्माता और संबंधित टीम के सदस्यों के नाम शामिल हैं। विवाद बढ़ने के बाद फिल्म की रिलीज पर भी सवाल उठ रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर फिल्मों में रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन की बहस छेड़ रही है। आगे की जांच जारी है।

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