रिहाई की सूचना मिलते ही सुबह से जेल के बाहर सैकड़ों समर्थक जमा हो गए थे। पिंकी चौधरी और उनके बेटे को मालाएं पहनाकर स्वागत किया गया, मिठाई बांटी गई और जमकर नारेबाजी हुई। इसके बाद गाड़ियों का लंबा काफिला निकला, जिसमें समर्थक कारों की खिड़कियों से बाहर लटककर नारे लगाते रहे। चलती गाड़ियों से आतिशबाजी और स्काईशॉट फोड़े गए, जिससे ट्रैफिक जाम हो गया और कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई गईं। इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
क्या था पूरा मामला?
बता दें कि 29 दिसंबर 2025 को पिंकी चौधरी और उनके संगठन के कार्यकर्ताओं ने शालीमार गार्डन में स्टॉल लगाकर और घर-घर जाकर सैकड़ों तलवारें बांटी थीं। पुलिस ने सूचना मिलते ही छापा मारकर 10 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया और कई तलवारें बरामद कीं। पिंकी चौधरी और उनका बेटा उस समय फरार हो गए थे। फरारी के दौरान उन्होंने वीडियो जारी कर तलवार वितरण को ‘हिंदुओं की आत्मरक्षा’ बताया और पुलिस को चुनौती दी। आखिरकार 6 जनवरी 2026 को दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
रिहाई के बाद समर्थकों के इस शक्ति प्रदर्शन से पुलिस-प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। आम राहगीरों को भी काफी परेशानी हुई। पुलिस ने वायरल वीडियोज का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की बात कही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
यह मामला सोशल मीडिया पर भी गरमाया हुआ है, जहां एक तरफ समर्थक जश्न मना रहे हैं तो दूसरी तरफ आलोचक कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

