जानकारी के अनुसार, आरोपी मुकेश कुमार (प्रोप्राइटर, एमपी ट्रेडिंग) ने मुरादनगर की आदर्श कॉलोनी में फर्जी पता दिखाकर जीएसटी नंबर प्राप्त किया था। मेडिकल स्टोर का लाइसेंस उसने हापुड़ जिले से बनवाया। जब भौतिक सत्यापन किया गया तो दिए गए पते पर कोई फर्म या स्टोर मौजूद नहीं मिला। पुलिस को शक है कि इस गिरोह के पीछे कुछ प्रभावशाली लोगों का हाथ हो सकता है और बैंक खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है।
यह पूरा मामला उस समय खुला जब अलीगढ़ के एक विक्रेता को लिव-52 डीएस की सप्लाई मिली। पैकेजिंग और दवा की क्वालिटी में अंतर देखकर विक्रेता को शक हुआ और उसने हिमालया कंपनी को सूचना दी। कंपनी के प्रतिनिधि ललित कुमार ने जांच की तो पुष्टि हुई कि यह दवा पूरी तरह नकली है और इसका निर्माण हिमालया वैलनेस ने नहीं किया है।
पुलिस ने आरोपी मुकेश कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज तैयार करने और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है। आशंका है कि गिरोह के पास अभी भी नकली दवाओं का बड़ा स्टॉक मौजूद होगा, जिसे बाजार में खपाने की योजना थी। फिलहाल पुलिस सिंडिकेट के मुख्य सरगनाओं की तलाश में जुटी है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी की कोई खबर नहीं है।
हिमालया की लिव-52 लीवर संबंधी समस्याओं के लिए लोकप्रिय आयुर्वेदिक दवा है। ऐसे नकली दवा रैकेट से मरीजों की सेहत को गंभीर खतरा होता है। पुलिस जांच आगे बढ़ा रही है और जल्द बड़े खुलासे की उम्मीद है।

