गौतमबुद्ध नगर। जनपद की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने आज विकास और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को गति देने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट परिसर स्थित संयुक्त कार्यालय के विभिन्न पटलों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कार्यालय की कार्यसंस्कृति, पत्रावलियों (Files) के रखरखाव और जनता से जुड़े लंबित मामलों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने असल्हा बाबू के पटल की जांच की। रजिस्टर चेक किया कितनी पेंडेसी है।
निरीक्षण के मुख्य बिंदु
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने एक-एक कर विभिन्न पटलों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि कार्यों में शिथिलता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के मुख्य आकर्षण निम्नलिखित रहे:
- अभिलेखों का मानकीकरण: डीएम ने निर्देश दिए कि सभी सरकारी अभिलेख और फाइलें मानकों के अनुरूप सुव्यवस्थित रखी जाएं। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड रूम और पटलों पर पत्रावलियों का वर्गीकरण इस प्रकार हो कि जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत खोजा जा सके।
- पेंडेंसी पर सख्त रुख: समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने उन प्रकरणों पर नाराजगी जाहिर की जो लंबे समय से लंबित हैं। उन्होंने संबंधित पटल प्रभारियों को निर्देश दिए कि लंबित प्रकरणों का निस्तारण समय सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए ताकि आम जनता को बार-बार कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।
- साफ-सफाई और अनुशासन: कार्यालय में साफ-सफाई और कर्मचारियों की समयबद्धता को लेकर भी डीएम ने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
कार्यप्रणाली में सुधार की हिदायत
जिलाधिकारी मेधा रूपम ने जोर देकर कहा कि सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों से कहा: “जनता की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण हमारी प्राथमिकता है। पत्रावलियों का रखरखाव केवल कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि सुशासन का आधार है। इसमें लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
निरीक्षण के अंत में उन्होंने संबंधित अधिकारियों को एक निश्चित समय सीमा (Deadline) दी है, जिसके भीतर सभी पेंडिंग कार्यों को निपटाकर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस औचक निरीक्षण से कलेक्ट्रेट कर्मियों में हड़कंप की स्थिति रही, वहीं दूसरी ओर इसे प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

