From the aroma of spinach and paneer to discrimination: भारतीय पीएचडी छात्रों को अमेरिकी यूनिवर्सिटी से मिला 1.8 करोड़ का मुआवजा

From the aroma of spinach and paneer to discrimination: अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर में पालक पनीर गर्म करने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़े समझौते पर खत्म हुआ है। भारतीय पीएचडी छात्र अदित्य प्रकाश (34) और उनकी साथी उर्मी भट्टाचार्य (35) ने विश्वविद्यालय पर नस्लीय भेदभाव और प्रतिशोध का आरोप लगाते हुए मुकदमा लड़कर 2 लाख डॉलर (लगभग 1.8 करोड़ रुपये) का समझौता हासिल किया है।

घटना सितंबर 2023 की है, जब अदित्य प्रकाश डिपार्टमेंट के माइक्रोवेव में अपना पालक पनीर गर्म कर रहे थे। एक स्टाफ सदस्य ने इसकी “तीखी गंध” की शिकायत की और उन्हें ऐसा न करने को कहा। प्रकाश ने जवाब दिया, “यह सिर्फ खाना है, मैं गर्म करके चला जाऊंगा।” इसके बाद मामला बिगड़ा और दोनों छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय ने उनके खिलाफ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया।

मुख्य आरोप और समझौता
• छात्रों का दावा: डिपार्टमेंट की किचन पॉलिसी दक्षिण एशियाई लोगों को निशाना बनाती थी, जहां भारतीय खाने की खुशबू को लेकर आम क्षेत्रों में लंच खोलने से रोका जाता था।
• प्रतिशोध: प्रकाश को बार-बार मीटिंग में बुलाया गया और स्टाफ को “असुरक्षित महसूस” कराने का आरोप लगाया गया। उर्मी को टीचिंग असिस्टेंट की नौकरी से बिना वजह निकाल दिया गया और उन्हें “दंगा भड़काने” का आरोप लगाया गया।
• मई 2025 में फेडरल सिविल राइट्स मुकदमा दायर हुआ। सितंबर 2025 में समझौता: 2 लाख डॉलर मुआवजा, दोनों को मास्टर्स डिग्री प्रदान की गई, लेकिन भविष्य में यूनिवर्सिटी में दाखिला या नौकरी पर रोक।
• दोनों छात्र इस महीने भारत लौट आए।

यूनिवर्सिटी ने समझौते की पुष्टि की, लेकिन कोई गलती स्वीकार नहीं की। प्रवक्ता ने कहा, “भेदभाव और उत्पीड़न के आरोपों के लिए हमारे पास प्रक्रिया है और हमने उसी का पालन किया।”

ताजा अपडेट: सोशल मीडिया पर वायरल, लोग सराह रहे बहादुरी
आज सुबह से यह खबर भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। उर्मी भट्टाचार्य ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिखा, “इस साल मैंने एक लड़ाई लड़ी—जो खाना चाहूं खाने की आजादी की, विरोध करने की आजादी की, चाहे मेरी त्वचा का रंग कोई भी हो, मेरी जातीयता कोई भी हो या मेरा भारतीय लहजा। मैं अन्याय से झुकूंगी नहीं, चुप नहीं रहूंगी।”
यूजर्स बधाई दे रहे हैं:
• एक यूजर ने लिखा, “पालक पनीर खाकर ही जश्न मनाऊंगा!”
• दूसरे ने कहा, “सही तरीके से आवाज उठाने का यह उदाहरण है। साहस को सलाम।”
• कई ने लिखा, “हमारे लिए तो यह खुशबू है, वे लोग समझें।”

यह मामला विदेशों में भारतीय छात्रों के सामने आने वाले सांस्कृतिक भेदभाव को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समझौते दूसरे पीड़ितों को आवाज उठाने की हिम्मत देंगे।

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