रिहाई का कारण
अमिताभ ठाकुर को 19 जनवरी को देवरिया जिला जज की अदालत से जमानत मिली थी, लेकिन लखनऊ के गोमतीनगर थाने से जारी वारंट बी के कारण उनकी रिहाई अटकी हुई थी। वारंट बी रद्द होने के बाद बुधवार शाम रिहाई का परवाना जेल पहुंचा और औपचारिकताएं पूरी कर उन्हें रिहा कर दिया गया। जेल से निकलते समय वे पूरी तरह स्वस्थ दिखे। गेट खुलने में देरी होने पर उन्होंने खुद जेलकर्मियों से कहा, “साहब, जल्दी गेट खुलवाइए।” रिहा होने के बाद अमिताभ ठाकुर परिजनों के साथ किसी गुप्त स्थान पर चले गए। उनके वकील प्रवीण द्विवेदी ने रिहाई की पुष्टि की, लेकिन आगे की कोई जानकारी नहीं दी।
मामला क्या है?
यह मामला 1999 का है, जब अमिताभ ठाकुर देवरिया के पुलिस अधीक्षक थे। आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर देवरिया औद्योगिक क्षेत्र में प्लॉट आवंटन कराया और दस्तावेजों में नाम गलत दर्ज कर धोखाधड़ी की। सितंबर 2025 में लखनऊ के तालकटोरा थाने में मुकदमा दर्ज हुआ, जिसकी जांच एसआईटी को सौंपी गई। 9 दिसंबर को शाहजहांपुर में उन्हें गिरफ्तार किया गया और 10 दिसंबर से देवरिया जेल में बंद थे।
जेल में सुर्खियां बटोरते रहे
जेल में रहते हुए भी अमिताभ ठाकुर चर्चा में रहे। उन्होंने जब्त सामान वापसी के लिए आमरण अनशन किया, धमकी भरा पत्र मिलने की शिकायत की और कोडीन कफ सिरप कांड में बड़े नेताओं के नाम लेते हुए कहा कि उनके पास सबूत हैं, इसलिए गिरफ्तारी कराई गई। रिहाई के बाद अमिताभ ठाकुर की आगे की योजना स्पष्ट नहीं है। मामले की जांच जारी है और राजनीतिक गलियारों में इस रिहाई पर चर्चा तेज हो गई है।

