भारत के बजट की दिलचस्प दास्तान: पहला बजट, परंपराओं का बदलाव और निर्मला सीतारमण के रिकॉर्ड

First budget :

First budget : नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को देश का आम बजट पेश करने जा रही हैं। इसके साथ ही वह एक नया इतिहास रचने के करीब हैं। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा। इससे पहले यह रिकॉर्ड पूर्व वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के नाम दर्ज है, जिन्होंने 10 बार बजट पेश किया था।

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भारत के आम बजट से जुड़ी कई रोचक ऐतिहासिक, राजनीतिक और परंपरागत कहानियां हैं, जो समय के साथ बदलती रहीं। कभी बजट शाम को पेश होता था, तो आज सुबह संसद में रखा जाता है। कभी ब्रीफकेस में बजट लाया जाता था, तो अब टैबलेट पर डिजिटल दस्तावेज पेश किए जाते हैं।

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1860 में पेश हुआ था भारत का पहला बजट

भारत का पहला बजट वर्ष 1860 में ब्रिटिश शासन के दौरान पेश किया गया था। इसे स्कॉटिश अर्थशास्त्री जेम्स विल्सन ने तैयार किया था। इस बजट का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक और सैन्य खर्चों को सुव्यवस्थित करना था।

आज़ाद भारत का पहला बजट

स्वतंत्रता के बाद भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को तत्कालीन वित्त मंत्री आर.के. शनमुगम चेट्टी ने पेश किया था। यह बजट केवल साढ़े सात महीने की अवधि के लिए था, क्योंकि देश नई प्रशासनिक और आर्थिक व्यवस्था में प्रवेश कर रहा था।

नेहरू भी बने वित्त मंत्री

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी कुछ समय के लिए वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली थी। उन्होंने 13 फरवरी से 13 मार्च 1958 तक वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया, जो भारत के इतिहास का सबसे छोटा वित्त मंत्री कार्यकाल माना जाता है।

पहली महिला वित्त मंत्री कौन?

आम धारणा के विपरीत, देश की पहली महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नहीं, बल्कि इंदिरा गांधी थीं। 1970 में मोरारजी देसाई के इस्तीफे के बाद इंदिरा गांधी ने वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभालते हुए बजट पेश किया था।
हालांकि, पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री के रूप में बजट पेश करने वाली पहली महिला निर्मला सीतारमण ही हैं, जिन्होंने 2019 में यह जिम्मेदारी संभाली।

सबसे ज्यादा बजट पेश करने का रिकॉर्ड

अब तक सबसे ज्यादा 10 बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड मोरारजी देसाई के नाम है। निर्मला सीतारमण इस रिकॉर्ड से अब सिर्फ एक कदम दूर हैं।

सबसे लंबा बजट भाषण

वर्ष 2020 में निर्मला सीतारमण ने 2 घंटे से अधिक समय तक बजट भाषण दिया था, जो अब तक का सबसे लंबा बजट भाषण है। भाषण के दौरान उन्हें थकावट के कारण बीच में रुकना भी पड़ा था।

1973 का ‘ब्लैक बजट’

1973 में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंतराव बी. चव्हाण द्वारा पेश किए गए बजट को ‘ब्लैक बजट’ कहा गया। उस समय 550 करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा था, जो उस दौर में बेहद चिंताजनक माना गया।

शाम 5 बजे से सुबह 11 बजे तक का सफर

1998 तक आम बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था। यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही थी। बाद में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस परंपरा को तोड़ते हुए बजट सुबह 11 बजे पेश करने की शुरुआत की।

28 फरवरी से 1 फरवरी तक

पहले बजट हर साल 28 फरवरी को पेश किया जाता था। वर्ष 2017 में मोदी सरकार ने इसकी तारीख बदलकर 1 फरवरी कर दी। वर्ष 2026 में बजट रविवार के दिन पेश किया जाएगा।

ब्रीफकेस से टैबलेट तक

2019 में पहली बार बजट ब्रीफकेस की जगह टैबलेट में लाया गया। लाल कवर में रखा टैबलेट अब बजट पेश करने की नई पहचान बन चुका है।

पेपरलेस बजट की शुरुआत

वर्ष 2021 में भारत का बजट पूरी तरह डिजिटल हो गया। सांसदों को बजट दस्तावेज टैबलेट के माध्यम से उपलब्ध कराए गए।

रेलवे बजट की परंपरा समाप्त

कई वर्षों तक अलग से पेश होने वाला रेलवे बजट वर्ष 2017 में आम बजट में शामिल कर दिया गया। आखिरी रेलवे बजट 25 फरवरी 2016 को सुरेश प्रभु ने पेश किया था।

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