सितंबर 2025 में पटना यूनिवर्सिटी के छात्रों ने बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी पीड़ा बयां की। एक वीडियो रिपोर्ट में छात्राओं ने खुलासा किया कि कैंपस में छेड़खानी, हॉस्टल के लड़कों द्वारा असम्मानजनक व्यवहार और रैगिंग जैसी घटनाएं आम हो चुकी हैं। एक छात्रा ने कहा, “लड़की के लिए बिल्कुल सेफ नहीं है यूनिवर्सिटी। यहां के लड़के इतने बदतमीज हैं, लड़की को असॉल्ट करते हैं, हेरासमेंट करते हैं और बहुत गंदा एनवायरनमेंट है।” यह दावा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जहां छात्रा ने आरोप लगाया कि हॉस्टल के लड़के लड़कियों को ‘मटेरियल ऑब्जेक्ट’ की तरह ट्रीट करते हैं।
लल्लनटॉप की एक विशेष रिपोर्ट में छात्राओं ने बताया कि क्लास खत्म होते ही वे जल्दबाजी में कैंपस छोड़ देती हैं, क्योंकि रात में असुरक्षा का खतरा बढ़ जाता है। “हम सेफ नहीं…” यही शब्द छात्राओं के मुंह से निकल रहे हैं। एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में सिविल सर्विसेज एस्पिरेंट निशा भारती ने लिखा, “पर्सिस्टेंट हेरासमेंट ऑफ फीमेल स्टूडेंट्स एट पटना यूनिवर्सिटी डिमांड्स एक्शन। अथॉरिटीज एंड पटना पुलिस की फेलियर एक क्रिटिकल लैप्स है।” यह पोस्ट 26 सितंबर को वायरल हुई, जिसमें तत्काल सुरक्षा उपायों की मांग की गई।
यह समस्या नई नहीं है। मार्च 2025 में पटना वुमेंस कॉलेज के पास छात्र चुनाव के दौरान दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें गोलीबारी तक हो गई। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने तब ट्वीट किया, “पटना यूनिवर्सिटी डिजर्व्स सेफ्टी एंड फ्रीडम!” उन्होंने महिलाओं के हॉस्टल में 24/7 एंट्री-एग्जिट और हिंसा-मुक्त कैंपस की मांग की। जून 2025 में पटना के बिशप स्कॉट गर्ल्स स्कूल में एक 14 वर्षीय छात्रा के साथ शिक्षक द्वारा बलात्कार का मामला सामने आया, जहां स्कूल प्रशासन ने पहले पीड़िता को ही निलंबित करने की कोशिश की। हालांकि यह यूनिवर्सिटी से सीधे जुड़ा नहीं, लेकिन पटना के शैक्षिक संस्थानों में बढ़ती असुरक्षा का पैटर्न दिखाता है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी पटना महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित शहरों में शुमार है। एनसीडब्ल्यू की ‘नारी 2025’ रिपोर्ट के अनुसार, 40 प्रतिशत महिलाएं पटना में असुरक्षित महसूस करती हैं, और केवल एक-तिहाई ही उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराती हैं। रिपोर्ट में कोहिमा को सबसे सुरक्षित बताया गया, जबकि पटना सबसे निचले पायदान पर है। यूनिवर्सिटी कैंपस में सुविधाओं की कमी भी चिंता बढ़ा रही है। एक पोस्ट में केशव सिंह ने लिखा, “लड़कियों के लिए केवल दो टॉयलेट हैं और वो भी खराब हैं। वॉटर कूलर से गर्म पानी आ रहा है। क्या विश्वविद्यालय का मतलब सिर्फ क्लासरूम है?”
प्रशासन की चुप्पी ने जिम्मेदारी का सवाल और गहरा कर दिया है। यूनिवर्सिटी वीसी और पटना पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लग रहा है। छात्र संगठन एनएसयूआई और अन्य ग्रुप्स ने सुरक्षा उपायों जैसे सीसीटीवी इंस्टॉलेशन, 24/7 सिक्योरिटी और एंटी-रैगिंग कैंपेन की मांग की है। पटना वुमेंस कॉलेज ने अगस्त 2025 में एंटी-रैगिंग डे मनाया, लेकिन यूनिवर्सिटी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठा।
महिलाओं की सुरक्षा शिक्षा का आधार है, लेकिन पटना यूनिवर्सिटी में यह आधार ही हिल रहा है। क्या बिहार सरकार और यूनिवर्सिटी प्रशासन ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नारे को साकार करेंगे, या डर का साया और गहरा होगा? छात्राओं की आवाज़ अब अनसुनी नहीं रहनी चाहिए।

