समझौते के अनुसार, भारत अमेरिका से ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGS), लाल ज्वार (रेड सोरघम), मेवे (ट्री नट्स), ताजे व प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल आदि कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम करेगा या खत्म करेगा। DDGS इथेनॉल उत्पादन का उप-उत्पाद है, जो प्रोटीन युक्त पशु चारा माना जाता है।
किसान संगठन जैसे संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKS) और आशा-किसान स्वराज का कहना है कि DDGS और लाल ज्वार के आयात से पशु आहार बाजार में अमेरिकी कंपनियों का एकाधिकार हो जाएगा। इससे मक्का, ज्वार और सोयाबीन की घरेलू कीमतें गिरेंगी, जिससे किसानों की आय प्रभावित होगी। कुछ संगठनों ने आशंका जताई है कि अमेरिकी DDGS और सोयाबीन तेल में आनुवंशिक संशोधित (GMO) सामग्री हो सकती है, जो भारतीय बाजार में प्रवेश कर सकती है।
हालांकि, सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज किया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह आयात पूरी तरह सीमित और कोटा-आधारित है। DDGS का आयात कोटा मात्र 5 लाख टन सालाना है, जो देश की कुल 50 मिलियन टन पशु चारा खपत का सिर्फ 1% है। उन्होंने जोर दिया कि डेयरी, अनाज, मक्का जैसे संवेदनशील क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं और GMO फसलों पर कोई रियायत नहीं दी गई।
गोयल के अनुसार, यह आयात पोल्ट्री, डेयरी और मत्स्य पालन क्षेत्र की बढ़ती मांग को पूरा करेगा, चारे की कीमतों में स्थिरता लाएगा और खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद करेगा।
व्हाइट हाउस द्वारा जारी संयुक्त बयान में भी इन कृषि उत्पादों पर भारत की तरफ से शुल्क कटौती का उल्लेख है, लेकिन डेयरी या GMO से जुड़े किसी प्रावधान का जिक्र नहीं है।
किसान संगठनों ने इस समझौते को “पूर्ण समर्पण” करार देते हुए प्रदर्शन की तैयारी तेज कर दी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

