नोएडा (गौतमबुद्धनगर)। जमीन की रजिस्ट्री कराने आए बुजुर्गों के लिए अब राहत की खबर है। उँगलियों के निशान न मिलने की वजह से बार-बार कार्यालय के चक्कर काटने की मजबूरी अब खत्म होगी। गौतमबुद्ध नगर प्रशासन ने फैसला किया है कि 1 अप्रैल 2025 से जिले के सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में आइरिस (आँख की पुतली) स्कैन मशीन के जरिए आधार सत्यापन की सुविधा शुरू की जाएगी।
क्या है समस्या?
जिले के सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्रियाँ होती हैं। इस प्रक्रिया में आधार सत्यापन अनिवार्य है, जो अभी तक फिंगरप्रिंट स्कैनिंग के जरिए होता था। लेकिन यह व्यवस्था खासतौर पर बुजुर्गों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं थी। बुजुर्गों की उँगलियों की लकीरें नहीं पहचानती मशीन, इसलिए अब ‘आँख’ से होगी पहचान; 10 मशीनों का ऑर्डर दिया।
एडीएम प्रथम, गौतमबुद्ध नगर अरुण कुमार शर्मा ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ हाथों की लकीरें हल्की पड़ जाती हैं या घिस जाती हैं, जिसके कारण फिंगरप्रिंट मशीन में स्पष्ट निशान नहीं आ पाते। नतीजतन, सत्यापन की प्रक्रिया लंबी खिंच जाती है और लोगों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
10 फीसदी रजिस्ट्रियों में आती है रुकावट
अधिकारियों के अनुसार, जिले में होने वाली कुल रजिस्ट्रियों में से करीब 10 प्रतिशत मामलों में फिंगरप्रिंट स्कैनिंग के दौरान दिक्कत आती है। यानी हर 10 में से एक व्यक्ति को इस तकनीकी अड़चन का सामना करना पड़ता है। यह संख्या छोटी नहीं है — इससे न केवल आवेदकों का समय बर्बाद होता है, बल्कि कार्यालयों में अनावश्यक भीड़ और देरी भी बढ़ती है।
क्या है नया समाधान?
इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रशासन ने आइरिस स्कैन तकनीक लागू करने का निर्णय लिया है। आइरिस स्कैन में आँख की पुतली के अनूठे पैटर्न को पहचानकर व्यक्ति की पहचान की जाती है। यह तकनीक उम्र या शारीरिक मेहनत से प्रभावित नहीं होती, इसलिए बुजुर्गों और मजदूरी करने वालों के लिए यह कहीं अधिक भरोसेमंद और सटीक विकल्प है।
अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती चरण में 10 आइरिस स्कैन मशीनों का ऑर्डर दिया जा चुका है। इन मशीनों के इंस्टॉल होते ही आवेदक फिंगरप्रिंट की जगह आँख की स्कैनिंग से आधार सत्यापन करा सकेंगे। इससे प्रक्रिया न केवल तेज होगी बल्कि त्रुटिरहित भी होगी।
किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
- बुजुर्ग नागरिक — जिनकी उँगलियों की लकीरें उम्र के साथ धुंधली पड़ गई हैं
- शारीरिक श्रम करने वाले — जिनके फिंगरप्रिंट घिसाव के कारण स्पष्ट नहीं होते
- दिव्यांगजन — जिनके हाथ या उँगलियाँ किसी कारण से अक्षम हों
- आम नागरिक — जिन्हें बार-बार कार्यालय आने की मजबूरी से मुक्ति मिलेगी
प्रशासन की प्राथमिकता — डिजिटल और सहज सेवा
यह कदम उत्तर प्रदेश सरकार की उस व्यापक मंशा के अनुरूप है, जिसके तहत रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और नागरिक-हितैषी बनाया जा रहा है। गौतमबुद्ध नगर में यह पहल पूरे प्रदेश के लिए एक मॉडल बन सकती है। यदि यह व्यवस्था सफल रही तो इसे अन्य जिलों में भी लागू किए जाने की उम्मीद है। नोएडा में 1 अप्रैल से रजिस्ट्री कार्यालयों में आइरिस स्कैन मशीन से आधार सत्यापन होगा। 10 मशीनों का ऑर्डर दिया जा चुका है। बुजुर्गों के फिंगरप्रिंट न मिलने की समस्या से लगभग 10% रजिस्ट्रियाँ प्रभावित होती थीं, जिससे अब मुक्ति मिलेगी।

