Noida News: दिल्ली एनसीआर में बढते प्रदूषण पर काबू पाने के लिए कई उपाय किये जा सकते है। इस क्षेत्र में वाहनों से निकले वाला धुआं प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण साबित हो रहा है। ऐसे नोएडा और ग्रेटर नोएडा में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके अनुपात में ईवी चार्जिंग की पर्याप्त व्यवस्था अब भी नहीं हो पाई है। खासतौर पर हाईराइज सोसाइटी और अपार्टमेंट्स में रहने वाले लोगों को चार्जिंग को लेकर गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई सोसाइटी में न तो कॉमन चार्जिंग प्वाइंट हैं और न ही पार्किंग में निजी चार्जर लगाने की स्पष्ट अनुमति या तकनीकी ढांचा उपलब्ध है, जिससे ईवी उपयोगकर्ता असमंजस में हैं।
ये हो सकते है विक्लप
बता दें कि हाईराइज इमारतों में ईवी चार्जिंग के लिए कई विकल्प मौजूद हैं। सोसाइटी स्तर पर कॉमन चार्जिंग स्टेशन बनाए जा सकते हैं, जहां स्लॉट आधारित चार्जिंग की सुविधा हो। इसके अलावा बेसमेंट या स्टिल्ट पार्किंग में डेडिकेटेड ईवी पार्किंग स्लॉट चिन्हित कर वहां स्लो या मीडियम चार्जर लगाए जा सकते हैं। कुछ मामलों में फ्लैट मालिकों को अपने निजी पार्किंग स्लॉट पर मीटर आधारित निजी चार्जर लगाने की अनुमति दी जा सकती है, बशर्ते फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी मानकों का पालन हो।
प्राधिकरण उठाए ऐसे कदम तो होगा समाधान
इस समस्या के समाधान के लिए नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कई अहम कदम उठा सकते हैं। नए आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स के नक्शा पास करते समय ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अनिवार्य शर्त बनाया जा सकता है। मौजूदा सोसाइटी के लिए रेट्रोफिट पॉलिसी लाकर सब्सिडी या आसान मंजूरी प्रक्रिया दी जा सकती है, ताकि वे बिना ज्यादा खर्च के चार्जिंग स्टेशन स्थापित कर सकें। इसके साथ ही मॉल, ऑफिस कॉम्प्लेक्स, मेट्रो स्टेशन, सेक्टर मार्केट और सार्वजनिक पार्किंग स्थलों पर पब्लिक ईवी चार्जिंग स्टेशन तेजी से विकसित किए जा सकते हैं।
प्राधिकरण चाहें तो निजी कंपनियों के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत चार्जिंग स्टेशन स्थापित कर सकता है, जिससे निवेश भी आए और नेटवर्क भी तेजी से फैले। साथ ही, बिजली आपूर्ति को मजबूत करने, स्मार्ट मीटरिंग, टाइम-ऑफ-डे टैरिफ और फायर एनओसी जैसी प्रक्रियाओं को सरल बनाकर ईवी चार्जिंग को बढ़ावा दिया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस नीति और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन किया गया, तो नोएडा-ग्रेटर नोएडा ईवी फ्रेंडली शहर बनने की दिशा में बड़ी छलांग लगा सकता है।
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