नोएडा। भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) न केवल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि विशेष रूप से नोएडा के जीवंत टेक्सटाइल और गारमेंट्स सेक्टर के लिए भी एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह समझौता यूपी के नोएडा के हजारों छोटे और मझोले टेक्सटाइल निर्यातकों के लिए यूरोपीय बाजार के बड़े दरवाजे खोल रहा है, जिससे वे वैश्विक मंच पर एक नई पहचान बना सकेंगे। पिछले दिनों अमेरिका के टैरिफ के चलते कॉफी निर्यात को पर असर पड़ा है। जिसके चलते एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियां बंद होने की कगार पर आ गई लेकिन इस समझौते के बाद उन्हें उम्मीद की एक और नई किरण दिखने लगी है।
वर्तमान बाधाएं और FTA से लाभ
अभी तक नोएडा के टेक्सटाइल निर्यातकों को यूरोपीय संघ में अपने उत्पादों को बेचने के लिए औसतन 9.6% का आयात शुल्क (Import Duty) चुकाना पड़ता था। यह शुल्क बांग्लादेश, वियतनाम, और पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को नहीं देना पड़ता, जिनके पास पहले से ही यूरोपीय संघ के साथ तरजीही व्यापार समझौते हैं। इस कारण भारतीय उत्पाद यूरोप में महंगे हो जाते थे और प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते थे।
FTA के लागू होने के साथ, नोएडा के टेक्सटाइल उत्पादों पर लगने वाला यह 9.6% शुल्क सीधे घटकर 0% हो जाएगा!
इसका सीधा अर्थ है:
- लागत में कमी: भारतीय वस्त्र यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे।
- मांग में वृद्धि: कम कीमत के कारण यूरोपीय खरीदार भारतीय उत्पादों को अधिक पसंद करेंगे।
- निर्यात की मात्रा में उछाल: अगले 5 वर्षों में टेक्सटाइल निर्यात में कम से कम 25-30% की वृद्धि का अनुमान है।
- रोजगार सृजन: बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए नई फैक्ट्रियां खुलेंगी और मौजूदा फैक्ट्रियों में विस्तार होगा, जिससे हजारों नए रोजगार पैदा होंगे, विशेषकर महिला श्रमिकों के लिए।
नोएडा का टेक्सटाइल हब: एक वैश्विक खिलाड़ी बनने की ओर
नोएडा में स्थित विशाल परिधान और टेक्सटाइल क्लस्टर, जो अपनी उच्च गुणवत्ता वाले रेडीमेड गारमेंट्स, होम फर्निशिंग और फैब्रिक के लिए जाना जाता है, अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत स्थिति हासिल कर पाएगा। यहां के निर्यातक, जो पहले से ही नवाचार और गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करते हैं, उन्हें अब अपने यूरोपीय समकक्षों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का अवसर मिलेगा।
नोएडा अप्रेरेल क्लस्टर के चेयरमैन ललित ठकुराल ने कहा, “यह हमारे लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। शून्य शुल्क से यूरोपीय खरीदारों के लिए भारतीय टेक्सटाइल अधिक आकर्षक होंगे। हम अपने उत्पादन क्षमता को बढ़ाने और यूरोपीय बाजार की विशिष्ट मांगों को पूरा करने के लिए तैयार हैं।”
आगे की चुनौतियां और तैयारी
हालांकि संभावनाएं अपार हैं, नोएडा के निर्यातकों को यूरोपीय संघ के कड़े गुणवत्ता मानकों, स्थिरता आवश्यकताओं और पर्यावरणीय नियमों (जैसे कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म – CBAM) का भी पालन करना होगा। विशेषज्ञों का सुझाव है कि निर्यातकों को अब अपनी उत्पादन प्रक्रियाओं को और अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने और अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणन प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। संक्षेप में, भारत-यूरोपीय संघ FTA नोएडा के टेक्सटाइल निर्यातकों के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आया है। यह समझौता उन्हें न केवल अपनी पहुंच का विस्तार करने में मदद करेगा, बल्कि वैश्विक टेक्सटाइल मानचित्र पर नोएडा को एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

