गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह रोडमैप दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मुख्य सचिवों की बैठक में साझा किया गया। इसमें 38 प्राथमिकता वाले जिलों में विकास, शिक्षा, आजीविका और गवर्नेंस पर फोकस है। साथ ही माओवादियों के शहरी नेटवर्क को तोड़ने के लिए सर्विलांस, तेज जांच और स्पेशल कोर्ट्स की योजना है।
ताजा अपडेट: 2025 में रिकॉर्ड प्रोग्रेस, 92 करोड़ की संपत्ति जब्त
• 2025 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या घटकर 11 रह गई (2014 में 126 थे)। सिर्फ तीन जिले सबसे ज्यादा प्रभावित।
• सुरक्षा बलों ने 270 नक्सलियों को न्यूट्रलाइज किया, 680 गिरफ्तार और 1,225 ने सरेंडर किया।
• दिसंबर 2025 में NIA, ED और अन्य एजेंसियों ने 92 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की, जिससे ‘अर्बन नक्सल्स’ को बड़ा झटका लगा।
• गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार जोर दिया कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद की विचारधारा और हिंसा दोनों खत्म होंगी।
रोडमैप के मुख्य बिंदु
• विकास सैचुरेशन: 137 केंद्रीय योजनाओं को तेजी से लागू करना, हर परिवार की मासिक आय 25-30 हजार तक पहुंचाना।
• सुरक्षा हैंडओवर: CAPF से राज्य पुलिस को जिम्मेदारी सौंपना, स्थानीय चुनाव कराना, महिला-आदिवासी नेतृत्व को बढ़ावा।
• अर्बन नक्सल एक्शन: माओवादी इकोसिस्टम और अलगाववादी तत्वों की पहचान, फंडिंग रोकना, NIA को बड़े केस सौंपना, स्पेशल कोर्ट्स गठित करना।
• वित्तीय नाकेबंदी: हथियार सप्लाई और फंडिंग पर अंतर-राज्य समन्वय, तेंदू पत्ता संग्रहण की नई नीति।
सरकार का मानना है कि अर्बन नक्सल्स प्रमुख संस्थानों में गहरी जड़ें जमाए बैठे हैं, जो नक्सलवाद को विचारधारा और फंडिंग से सपोर्ट करते हैं। इन पर सख्ती से नकेल कसकर नक्सल समस्या की जड़ खत्म की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्लान न केवल सुरक्षा बल्कि दीर्घकालीन शांति और विकास सुनिश्चित करेगा। मार्च 2026 की डेडलाइन नजदीक आने पर अभियान और तेज होगा।

