हिमायनी पुरी (न्यूयॉर्क में वित्तीय फिड्यूशरी, बैंकर और निवेशक) ने 10 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे के तहत याचिका दायर की थी। उन्होंने दावा किया कि फरवरी 2026 के अंत से एक “समन्वित और दुर्भावनापूर्ण ऑनलाइन अभियान” चलाया जा रहा है, जिसमें उन्हें एपस्टीन से बिना किसी आधार के जोड़ा जा रहा है। याचिका में कहा गया कि यह हमला इसलिए हो रहा है क्योंकि वे केंद्रीय मंत्री की बेटी हैं। कोर्ट में उनके वकील ने कहा, “यह झूठा आरोप एक दोषसिद्ध अपराधी से जुड़ाव का है। मैं इसका शिकार हूं क्योंकि मैं कैबिनेट मंत्री की बेटी हूं।”
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश केवल भारतीय क्षेत्राधिकार में अपलोड किए गए और उपलब्ध कंटेंट पर लागू होगा। अगर प्लेटफॉर्म तुरंत नहीं हटाते, तो 24 घंटे के अंदर हटाना अनिवार्य होगा। ग्लोबल टेकडाउन का मुद्दा अभी खुला रखा गया है और जवाब दाखिल होने के बाद इस पर विचार किया जाएगा। मेटा (फेसबुक-इंस्टाग्राम) समेत अन्य प्लेटफॉर्म्स (ट्विटर/एक्स, गूगल, यूट्यूब, लिंक्डइन) और जॉन डो डिफेंडेंट्स (अज्ञात व्यक्ति और कुछ पत्रकार) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा गया है। मेटा के वकील ने ग्लोबल ऑर्डर पर क्षेत्राधिकार का सवाल उठाया, जबकि कुछ पत्रकारों ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता का हवाला दिया।
हिमायनी पुरी ने अपनी वैश्विक प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए यह कदम उठाया है। कोर्ट ने कहा, “जवाब आने के बाद आगे विचार करेंगे। फिलहाल भारत में कंटेंट पर आदेश।” यह मामला आज ही सुनवाई के बाद फैसला सुनाया गया। अभी तक कोई नई अपडेट नहीं आई है और ग्लोबल ब्लॉक या मुकदमे की अगली सुनवाई का इंतजार है।

