नई दिल्ली | भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दुनिया के नक्शे पर एक रणनीतिक खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। हालिया आंकड़ों और वैश्विक व्यापारिक समीकरणों से स्पष्ट है कि भारत की रसोई में जलने वाली गैस (LPG) का हर तीसरा सिलेंडर कतर के सहयोग से आ रहा है। भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसमें पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण बनी हुई है।ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि भारत को सबसे ज़्यादा LPG कौन सा देश देता है चलिए बताते हैं…
कतर: भारत का भरोसेमंद ‘एनर्जी पार्टनर’
ताजा आंकड़ों के अनुसार, कतर भारत को एलपीजी निर्यात करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा देश बन गया है।
- बाजार हिस्सेदारी: भारत के कुल एलपीजी आयात में कतर की हिस्सेदारी लगभग 34 प्रतिशत है।
- व्यापार मूल्य: इस आपूर्ति की कुल कीमत लगभग $4.04 बिलियन (करीब 33,500 करोड़ रुपये) आंकी गई है।
- दीर्घकालिक समझौते: हाल ही में भारत की पेट्रोनेट एलएनजी (Petronet LNG) ने कतर के साथ 20 साल का एक ऐतिहासिक समझौता किया है, जो 2048 तक ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
यूएई और अन्य प्रमुख सप्लायर
कतर के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारत का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी सप्लायर है, जो कुल आयात का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है। इसके बाद कुवैत (8.3%) और सऊदी अरब का नंबर आता है। कुल मिलाकर, भारत की 90% से अधिक आयातित एलपीजी इन्हीं खाड़ी देशों से आती है।
चुनौतियां और रणनीतिक जोखिम: ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ का संकट
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चिंता भौगोलिक स्थिति है। भारत आने वाली एलपीजी का लगभग 85-90% हिस्सा ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है।
- मौजूदा संकट: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और संघर्ष के कारण इस समुद्री मार्ग पर आवाजाही प्रभावित होने का खतरा बना रहता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो भारत में गैस की किल्लत और कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
- घरेलू उत्पादन की सीमा: भारत अपनी जरूरत का केवल 40% हिस्सा ही घरेलू रिफाइनरियों में उत्पादित कर पाता है, जबकि उज्ज्वला योजना जैसी सफलताओं के कारण उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 33 करोड़ से अधिक हो गई है।
समाधान: सप्लाई चेन का विविधीकरण (Diversification)
खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के लिए भारत अब अन्य देशों की ओर भी रुख कर रहा है:
- अमेरिका (USA) से समझौता: भारत ने अमेरिका से करीब 2.2 मिलियन टन एलपीजी आयात करने का अनुबंध किया है, जो कुल आयात का 10% होगा।
- अन्य विकल्प: भारत अब रूस, नॉर्वे और कनाडा जैसे देशों से भी एलपीजी कार्गो हासिल करने की संभावनाएं तलाश रहा है।
- आपातकालीन निर्देश: सरकार ने हाल ही में ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ के तहत घरेलू रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और पेट्रोकेमिकल कार्यों में प्रोपेन-ब्यूटेन के उपयोग को सीमित करने के निर्देश दिए हैं।
विशेषज्ञ की राय: “भारत ने क्लीन कुकिंग (उज्ज्वला योजना) में वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया है, लेकिन इसकी कीमत बढ़ती आयात निर्भरता है। कतर के साथ मजबूत रिश्ते हमारी मजबूती हैं, लेकिन भविष्य की सुरक्षा के लिए अमेरिका और रूस जैसे देशों से आपूर्ति बढ़ाना समय की मांग है।”

