Edible oil also became more expensive: सरसों-रिफाइंड में 20-30 रुपये की उछाल, LPG के बाद रसोई पर डबल मार

Edible oil also became more expensive: एलपीजी सिलेंडर की बढ़ी कीमतों से अभी आम आदमी उबरा भी नहीं था कि रसोई में एक और झटका लगा है। मार्च 2026 के शुरुआती हफ्ते में सरसों तेल और रिफाइंड तेल (सोयाबीन, सनफ्लावर, पाम) के दामों में 20 से 30 रुपये प्रति लीटर तक की तेजी आ गई है।
क्या हैं ताजा भाव?
प्रमुख शहरों के बाजारों में सरसों तेल, जो पहले 150-170 रुपये प्रति लीटर था, अब 180-200 रुपये तक जा पहुंचा है। रिफाइंड तेल 170-190 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर है। ओडिशा के कटक जैसे बाजारों में रिफाइंड तेल 160 से बढ़कर 170 और पाम ऑयल 102 से 107 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

महंगाई की वजह क्या है?
ट्रेडर्स और बाजार सूत्रों के मुताबिक, ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट में आपूर्ति बाधित हुई है। भारत अपनी 60 से 70 फीसदी खाद्य तेल जरूरत आयात से पूरी करता है। ऊपर से कच्चे तेल की कीमतें मार्च में 69 डॉलर से उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे आयात लागत बढ़ी और कंपनियों ने दाम चढ़ा दिए। सरसों तेल, जो मुख्यतः घरेलू उत्पादन पर निर्भर है, वह भी मंडियों में कम आवक और बढ़ती मांग के दबाव में महंगा हो गया।

होटल-रेस्टोरेंट की भी बढ़ी मुश्किलें
कमर्शियल गैस की मार पहले से झेल रहे होटल और रेस्टोरेंट कारोबारी अब खाने के तेल की बढ़ी कीमतों से भी परेशान हैं। इसका असर खाने-पीने की चीजों के दाम पर भी पड़ने लगा है।

सरकार और विपक्ष आमने-सामने
विपक्ष ने इसे महंगाई का नया दौर बताते हुए सरकार को घेरा है। सरकार का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय जहाजों को छूट मिलने से हालात सुधर रहे हैं और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।

आगे क्या?
विशेषज्ञों का अनुमान है कि मध्य पूर्व संकट लंबा खिंचा तो तेल के दाम में 10 से 15 रुपये प्रति लीटर की और बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि मार्च-अप्रैल में सरसों की नई फसल आने पर घरेलू बाजार में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि अफवाहों में न आएं और जरूरत से ज्यादा स्टॉक न करें।​​​​​​​​​​​​​​​​

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