ईडी की मुख्य दलीलें
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ईडी की ओर से कहा:
• 8 जनवरी को कोयला घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्डरिंग जांच में आई-पैक के 10 ठिकानों पर छापेमारी हुई, जिसमें 2,742 करोड़ रुपये की अवैध आय शामिल है।
• ममता बनर्जी पुलिस कमिश्नर के साथ मौके पर पहुंचीं, ईडी अधिकारियों को धमकाया, डिजिटल डिवाइस, तीन आपराधिक दस्तावेज और एक अधिकारी का मोबाइल फोन ले गईं—यह “खुली चोरी” है।
• यह बाधा का “शॉकिंग पैटर्न” है—पहले सीबीआई जांच में धरना, अधिकारियों की गिरफ्तारी जैसे मामले।
• राज्य पुलिस ने ईडी के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज कीं और सीसीटीवी फुटेज हटा दी।
• ईडी ने डीजीपी राजीव कुमार समेत अधिकारियों के निलंबन, सीबीआई जांच और मुख्य सचिव को पक्षकार बनाने की मांग की।

ममता बनर्जी का पक्ष
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा:
• ईडी ने दो साल इंतजार किया और विधानसभा चुनाव से ठीक पहले छापेमारी की—यह पूर्वाग्रह पैदा करने की कोशिश है।
• मुख्यमंत्री सिर्फ 15 मिनट (दोपहर 12 से 12:15) मौके पर रहीं, कोई बाधा नहीं डाली।
• पंचनामा के अनुसार 12:05 तक कोई जब्ती नहीं हुई, आई-पैक में सिर्फ तृणमूल की चुनावी डेटा थी।
• छापेमारी राजनीतिक मकसद से की गई।
कोर्ट की टिप्पणियां
बेंच ने पूछा कि ईडी आई-पैक क्यों गई और जांच क्या है (प्रशांत किशोर से जुड़ा होने की पुष्टि हुई)। कोर्ट ने इसे गंभीर मामला बताते हुए दोनों पक्षों की दलीलें परीक्षण करने की बात कही। सुनवाई पूरी हो गई, लेकिन कोई अंतिम आदेश नहीं हुआ—नोटिस जारी कर आगे की प्रक्रिया तय की गई।
यह मामला केंद्र-राज्य टकराव और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता पर बड़ी बहस छेड़ रहा है। आगे की सुनवाई का इंतजार है।

