ED vs. Mamata Banerjee: आई-पैक छापेमारी में बाधा पर सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस, ईडी ने सीएम पर लगाए गंभीर आरोप; सुनवाई पूरी, नोटिस जारी

ED vs. Mamata Banerjee: सुप्रीम कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच आई-पैक छापेमारी मामले की सुनवाई में आज तीखी बहस हुई। ईडी ने ममता बनर्जी पर छापेमारी के दौरान बाधा डालने, सबूत चोरी करने और “मॉबोक्रेसी” को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया, जबकि ममता की ओर से कपिल सिब्बल ने छापेमारी के समय पर सवाल उठाते हुए इसे चुनावी पूर्वाग्रह बताया। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पांचोली की बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और नोटिस जारी किया।

ईडी की मुख्य दलीलें
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ईडी की ओर से कहा:
• 8 जनवरी को कोयला घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्डरिंग जांच में आई-पैक के 10 ठिकानों पर छापेमारी हुई, जिसमें 2,742 करोड़ रुपये की अवैध आय शामिल है।
• ममता बनर्जी पुलिस कमिश्नर के साथ मौके पर पहुंचीं, ईडी अधिकारियों को धमकाया, डिजिटल डिवाइस, तीन आपराधिक दस्तावेज और एक अधिकारी का मोबाइल फोन ले गईं—यह “खुली चोरी” है।
• यह बाधा का “शॉकिंग पैटर्न” है—पहले सीबीआई जांच में धरना, अधिकारियों की गिरफ्तारी जैसे मामले।
• राज्य पुलिस ने ईडी के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज कीं और सीसीटीवी फुटेज हटा दी।
• ईडी ने डीजीपी राजीव कुमार समेत अधिकारियों के निलंबन, सीबीआई जांच और मुख्य सचिव को पक्षकार बनाने की मांग की।

ममता बनर्जी का पक्ष
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा:
• ईडी ने दो साल इंतजार किया और विधानसभा चुनाव से ठीक पहले छापेमारी की—यह पूर्वाग्रह पैदा करने की कोशिश है।
• मुख्यमंत्री सिर्फ 15 मिनट (दोपहर 12 से 12:15) मौके पर रहीं, कोई बाधा नहीं डाली।
• पंचनामा के अनुसार 12:05 तक कोई जब्ती नहीं हुई, आई-पैक में सिर्फ तृणमूल की चुनावी डेटा थी।
• छापेमारी राजनीतिक मकसद से की गई।

कोर्ट की टिप्पणियां
बेंच ने पूछा कि ईडी आई-पैक क्यों गई और जांच क्या है (प्रशांत किशोर से जुड़ा होने की पुष्टि हुई)। कोर्ट ने इसे गंभीर मामला बताते हुए दोनों पक्षों की दलीलें परीक्षण करने की बात कही। सुनवाई पूरी हो गई, लेकिन कोई अंतिम आदेश नहीं हुआ—नोटिस जारी कर आगे की प्रक्रिया तय की गई।
यह मामला केंद्र-राज्य टकराव और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता पर बड़ी बहस छेड़ रहा है। आगे की सुनवाई का इंतजार है।

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