वर्तमान स्थिति और नुकसान
• उत्तराखंड: जनवरी 2026 में ऊंचाई वाले इलाकों में भी बर्फबारी शून्य के करीब। औली और जोशीमठ में टूरिज्म ठप, होटल बुकिंग्स कैंसल। स्थानीय लोग आर्टिफिशियल स्नो मशीनें (लंबे समय से बंद) चालू करने की मांग पर प्रदर्शन कर रहे। चमोली में फॉरेस्ट फायर्स बढ़े, रबी फसलों को 15-25% नुकसान। तुंगनाथ जैसे पीक्स पर बर्फ जमा नहीं हुई।
• कश्मीर: चिल्लाई कलां में 96% बारिश की कमी, 40% स्नो डेफिसिट। गुलमर्ग जैसे स्की डेस्टिनेशंस सूखे, टूरिज्म को करोड़ों का घाटा। लेह-लद्दाख में 70% कम बर्फ।
• कुल असर: 2024-25 और 2025-26 लगातार सूखी सर्दियां, 23 साल का रिकॉर्ड लो स्नो पर्सिस्टेंस (24% नीचे)। नदियां-झरने सूखने का खतरा, गर्मियों में पानी संकट। फॉरेस्ट फायर्स अनियंत्रित।
राहत की उम्मीद: IMD फोरकास्ट
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार:
• 19-22 जनवरी से पहला वेस्टर्न डिस्टर्बेंस: हल्की-मध्यम बर्फबारी ऊंचाई वाले इलाकों में।
• 22-25 जनवरी से दूसरा मजबूत WD: भारी स्नोफॉल गुलमर्ग, मनाली, शिमला, औली और कश्मीर घाटी में। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड में व्यापक बर्फबारी-बारिश।
• मैदानी इलाकों (दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, UP) में भी ठंड बढ़ेगी, कोहरा और हल्की बारिश संभव।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अस्थायी राहत है—क्लाइमेट चेंज से वेस्टर्न डिस्टर्बेंस कमजोर हो रहे हैं, लंबे समय में हिमालय की ‘वॉटर टावर’ स्थिति खतरे मे नजर आ रही है।
यह संकट टूरिज्म, कृषि और जल सुरक्षा पर गहरा असर डाल रहा है। विशेषज्ञ लंबी अवधि के उपायों की मांग कर रहे हैं। आने वाले WD से उम्मीद है कि सर्दी अपनी रंगत दिखाएगी।

