नोएडा-ग्रेटर नोएडा में पीने के पानी का संकट गहराया, टीडीएस मानक से कई गुना अधिक, मचा है हाहाकार

Noida Water Crisis:नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई सेक्टरों और रिहायशी इलाकों में पीने के पानी की समस्या लगातार जटिल होती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सप्लाई किया जा रहा पानी स्वाद में खारा है और उसमें टीडीएस (टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स) का स्तर तय मानकों से कहीं अधिक पाया जा रहा है। पानी की गुणवत्ता खराब होने के कारण लोगों को आरओ और बोतलबंद पानी पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिससे घरेलू खर्च भी बढ़ रहा है। प्राधिकरण पानी के बिल का चार्ज पूरा ले रहा है लेकिन सर्विस बहुत बेकार साबित हो रही है। दोनों प्राधिकरण के अफसर भी जल विभाग की कमी को स्वीकार करने से पीछे नही हटते। नोएडा और ग्रेनो वासी ऐसा पानी पीकर बीमार भी हो रहे है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है…
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक टीडीएस वाला पानी लंबे समय तक पीने से पेट, किडनी और त्वचा से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। कई इलाकों में भूजल के अत्यधिक दोहन और यमुना व गंगाजल की आपूर्ति में असमानता के कारण पानी में घुले लवण और अन्य तत्व बढ़ गए हैं। खासकर ग्राउंड वाटर आधारित सप्लाई वाले क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है।

भारतीय मानक ब्यूरो के पानी के लिए ये है नियम
बीआईएस (भारतीय मानक ब्यूरो) के अनुसार पीने के पानी में टीडीएस की स्वीकार्य सीमा 500 मिलीग्राम प्रति लीटर(mg/L)तक होनी चाहिए। कुछ विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 2000 mg/L तक की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इससे ऊपर का पानी स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता। इसी तरह पीने के पानी का पीएच मान 6.5 से 8.5 के बीच होना चाहिए, जबकि आयरन, फ्लोराइड, नाइट्रेट और आर्सेनिक जैसे तत्व भी तय सीमा में होने जरूरी हैं।

नोएडा के सेक्टर 27 आरडब्यलूए अध्यक्ष राजीव गर्ग का आरोप है कि जल परीक्षण और फिल्ट्रेशन की व्यवस्था नियमित रूप से नहीं की जा रही है। कई जगहों पर पुरानी पाइपलाइन और सीवेज लाइनों के पास से गुजरती जल आपूर्ति के कारण भी पानी दूषित हो रहा है। पूरे सेक्टर के लोग ऐेसा ही पानी इस्तेमाल करने को मजबूर है। लोगों ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से मांग की है कि पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच कराई जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

प्राधिकरण का दावा
वहीं प्राधिकरण स्तर पर दावा किया जाता है कि गंगाजल परियोजना और नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए स्थिति सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि अभी भी बड़ी आबादी को मानक के अनुरूप स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जल स्रोतों का संतुलित उपयोग, प्रभावी ट्रीटमेंट और सख्त निगरानी नहीं होगी, तब तक नोएडादृग्रेटर नोएडा में पीने के पानी की समस्या बनी रहेगी।


डेल्टा वन में दूषित जलापूर्ति की शिकायत पर एसीइओ ने लिया जायजा
ग्रेनो के सेक्टर डेल्टा वन में दूषित पानी सप्लाई होने की शिकायत की जांच करने प्राधिकरण के एसीईओ सुनील कुमार सिंह ने खुद मौके पर जल विभाग की टीम के साथ जायजा लिया।
एसीईओ ने सेक्टर के निवासियों और दूषित पानी की शिकायत करने वालों से बातचीत भी की। इन सभी ने साफ जलापूर्ति की बात कही। एसीईओ सुनील कुमार सिंह आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों से भी मिले। उनसे सेक्टर में जलापूर्ति के बारे में बात की।
आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने भी संतोष जाहिर किया है। वहीं, प्राधिकरण ने दूषित पानी की शिकायत करने वालों के घरोें से भी सैंपल लेकर जांच के लिए बुधवार को ही लैब भेज दिया है। जिन दो जगहों पर पाइपलाइन में लीकेज और कनेक्शन में दिक्क्त पाई गई थी, उसे भी बुधवार को ही दुरुस्त कर दिया गया है। प्राधिकरण के जल विभाग की तरफ से निवासियों से फिर अपील की गई है, कि ग्रेटर नोएडा एरिया में दूषित जलापूर्ति होने पर वरिष्ठ प्रबंधक जल (9205691408) और प्रबंधक जल (8937024017) के मोबाइल नंबरों पर सूचना अवश्य दें। प्राधिकरण की टीम इसे शीघ्र दुरुस्त कराएगी।

यहां से शेयर करें