‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ का कहर: ग्रेटर नोएडा वेस्ट से एक बेहद चिंताजनक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि बिसरख थाना पुलिस की कार्यशैली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
25 मार्च 2026 की रात करीब 10:30 बजे सेक्टर-52 क्षेत्र के पास एक तेज रफ्तार अज्ञात कार ने एक व्यक्ति को टक्कर मार दी। आरोप है कि कार चालक नशे की हालत में था और पूरी तरह लापरवाही से वाहन चला रहा था।
पीड़ित की गंभीर हालत, लाखों का खर्च
इस दुर्घटना में विवेक प्रकाश पाल गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें पैर, आंख, चेहरे और हाथों में गहरी चोटें आई हैं। हादसे के बाद उन्हें ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित सर्वोदय अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवार के अनुसार अब तक इलाज में लगभग 11 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। एक सर्जरी पूरी हो चुकी है जबकि दूसरी अभी बाकी है। डॉक्टरों का कहना है कि पूरी तरह ठीक होने में करीब एक साल का वक्त लग सकता है, जिससे वे लंबे समय तक काम करने में असमर्थ रहेंगे।
10 दिन बाद भी FIR नहीं — पुलिस पर संगीन आरोप
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इतने गंभीर हादसे के दस दिन बाद भी बिसरख थाने में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपी चालक मौके से फरार हो गया, लेकिन पुलिस ने न तो उसकी पहचान करने की कोशिश की और न ही उसे पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम उठाया।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ड्रिंक एंड ड्राइव की बढ़ती समस्या
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट में खुलेआम शराब पीकर गाड़ी चलाना एक आम समस्या बन चुकी है। रात के समय कई जगहों पर लोग कारों में बैठकर शराब का सेवन करते हैं, लेकिन पुलिस की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। नियमित चेकिंग, ब्रेथ एनालाइज़र टेस्ट और सख्त निगरानी की कमी के कारण ऐसे हादसे लगातार बढ़ रहे हैं।
पुलिस कमिश्नरेट पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने नोएडा पुलिस कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं — खासतौर पर यह कि जब क्षेत्र में खुलेआम ड्रिंक एंड ड्राइव हो रहा है, तो पुलिस प्रशासन इसे रोकने में असफल क्यों है?
पीड़ित परिवार की गुहार
पीड़ित की पत्नी ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपी के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए, चालक की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया जाए और परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए ताकि इलाज का खर्च उठाया जा सके। अब देखना यह है कि इस मामले में नोएडा पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी कब संज्ञान लेते हैं, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

