“डकैत को हीरो मत दिखाओ”: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बॉलीवुड और ओटीटी जगत को एक कड़ा संदेश दिया है। वाराणसी में सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित एक भव्य नाट्य प्रस्तुति के दौरान आदित्यनाथ ने कहा कि यह प्रस्तुति केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि नयी पीढ़ी को मूल्यों और आदर्शों से जोड़ने का एक प्रयास है।
क्या बोले सीएम योगी?
मुख्यमंत्री ने कहा, “एक समय था जब नेक किरदारों को खलनायक के रूप में दिखाया जाता था और खलनायकों को फिल्मों के जरिए नायक के रूप में पेश किया जाता था। इसका क्या नतीजा हुआ? पीढ़ियां बिगड़ रही थीं। लोग अन्याय, उत्पीड़न और शोषण के खिलाफ अपनी आवाज खो रहे थे, क्योंकि युवा पीढ़ी के सामने ऐसे आदर्श पेश नहीं किए जा रहे थे।”
फिल्म निर्माताओं, निर्देशकों और कलाकारों से अपील करते हुए उन्होंने कहा, “ऐसी फिल्में बननी चाहिए जो राष्ट्र के लिए प्रेरणा बनें। यदि किसी डकैत को नायक के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, तो युवा पीढ़ी उसे ही अपना आदर्श मानने लगेगी। इसलिए कभी भी डकैतों का महिमामंडन न करें।” उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सिनेमा ने ऐतिहासिक रूप से तब सकारात्मक भूमिका निभाई है जब उसने देश के आदर्शों को दर्शाया है।
किस संदर्भ में दिया बयान?
यह तीन-दिवसीय कार्यक्रम मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है। कार्यक्रम देखने हजारों की भीड़ बीएलडब्ल्यू मैदान पहुंची। इसी मंच से सीएम योगी ने फिल्म उद्योग की सामाजिक जिम्मेदारी पर यह तीखी टिप्पणी की।
बयान पर प्रतिक्रियाएं
योगी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल के वर्षों में बॉलीवुड और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर एंटी-हीरो और “ग्रे शेड” वाले किरदारों की लोकप्रियता बढ़ी है। कई लोगों ने इसे सराहा तो कुछ फिल्मकारों और लेखकों ने इसे रचनात्मक स्वतंत्रता पर अतिक्रमण बताया। सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों में तीखी बहस छिड़ गई है। उत्तर प्रदेश सरकार अपनी “यूपी फिल्म पॉलिसी” के तहत फिल्म उद्योग को प्रोत्साहन दे रही है, लेकिन सकारात्मक और सांस्कृतिक मूल्यों वाले कंटेंट पर ही जोर देती रही है। सीएम का संदेश साफ है “समाज को प्रेरित करने वाली फिल्में बनाएं, न कि नकारात्मक किरदारों को ग्लोरिफाई करें।“

