1990 का अभिशप्त पतझड़ 2026 में लौटा?: मंडल-कमंडल की तरह अब ईरान युद्ध, वेनेजुएला हस्तक्षेप और वैश्विक तेल संकट

1990 का अभिशप्त पतझड़ 2026 में लौटा?: ठीक 36 साल पहले 1990 में भारत एक साथ तीन संकटों से जूझ रहा था—मंडल आयोग की ओबीसी आरक्षण से जातीय विभाजन, कमंडल (अयोध्या रथ यात्रा) से सांप्रदायिक तनाव और खाड़ी युद्ध (इराक-कुवैत) जिसे देश पहली बार टीवी पर लाइव देखा जा रहा था। वीपी सिंह सरकार गिर गई, अर्थव्यवस्था हिली और नई भारत की नींव पड़ी। आज मार्च 2026 में दुनिया फिर उसी ‘अभिशप्त पतझड़’ की याद दिला रही है। यूक्रेन-रूस युद्ध जारी, सूडान और म्यांमार में गृहयुद्ध, लेकिन सबसे ताजा—अमेरिका-इजरायल का ईरान पर फरवरी 2026 में शुरू हुआ युद्ध और जनवरी में वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से निकोलस मादुरो का कब्जा। तेल की कीमतें फिर आसमान छू रही हैं और दुनिया लाइव युद्ध देख रही है।

1990 में 2 अगस्त को सद्दाम हुसैन ने कुवैत पर कब्जा किया, तेल की कीमतें दोगुनी हो गईं, भारत ने 1.75 लाख नागरिकों को एयरलिफ्ट किया और सीएनएन पर पिटर आर्नेट का लाइव प्रसारण शुरू हुआ था। उसी समय मंडल लागू हुआ, 19 सितंबर को राजीव गोस्वामी ने आत्मदाह कर लिया था। सितंबर को एलके आडवाणी की रथ यात्रा शुरू हुई, दंगे भड़के। नतीजा: वीपी सिंह सरकार 10 नवंबर को गिरी, आर्थिक उदारीकरण की राह खुली।

अब 2026 में स्थिति और गंभीर है। फरवरी 28, 2026 को अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू किया। सुप्रीम लीडर अली खामेनी पर हमले, मिसाइलें, ड्रोन—मध्य पूर्व में बहु-मोर्चा युद्ध छिड़ गया। हार्मुज जलडमरूमध्य बंद होने का खतरा, तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सात देशों से कोयलिशन बनाने को कहा है। यूएन विशेषज्ञ इसे ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’ बता रहे हैं।
इसी बीच वेनेजुएला की घटना ने दुनिया को चौंका दिया। 3 जनवरी 2026 को अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ चलाया—काराकास में बमबारी, मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़कर न्यूयॉर्क ले जाया गया। अब डेल्सी रोड्रिगेज कार्यवाहक राष्ट्रपति हैं। कुछ राजनीतिक कैदियों को रिहा किया गया, लेकिन यूएन फैक्ट-फाइंडिंग मिशन ने 12 मार्च को रिपोर्ट दी कि दमनकारी तंत्र अभी भी intact है—87 नए राजनीतिक गिरफ्तारियां हुईं। अमेरिका ने तेल प्रतिबंध हटाए, लेकिन क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ गई।

इन घटनाओं से भारत पर असर? 1990 की तरह तेल आयात महंगा, रुपया दबाव में गिरता जा रहा है। लेकिन अब भारत ज्यादा तैयार है—रिजर्व, विविधीकरण करके। वैश्विक स्तर पर सवाल वही: क्या ये संकट पुरानी व्यवस्था को तोड़कर नई बनाएंगे? 1990 में भारत उदारवादी, जातीय और हिंदुत्ववादी राजनीति में बदल गया। 2026 में दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था, तेल संकट और हस्तक्षेप की नई सदी में प्रवेश कर रही है? इतिहास दोहरा रहा है—विभाजन, आर्थिक झटका और लाइव युद्ध। सवाल है, क्या हम 1990 की गलतियों से सीखेंगे या फिर ‘अभिशप्त’ मौसम का इंतजार करेंगे?

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