डॉ. वर्मा के अनुसार, हर साल देशभर से छात्र विभिन्न कोर्सेस में तीन साल की ट्रेनिंग के लिए यहां आते हैं। इस बार डीएम कार्डियोलॉजी के पहले साल में डॉ. मोहम्मद आरिफ मीर ने अगस्त 2025 में सीनियर रेजिडेंट के रूप में जॉइन किया।
अस्पताल रिकॉर्ड्स में उनके पिता का नाम गुलाम हसन मीर दर्ज है और पता जम्मू-कश्मीर का है। यह डीएम कार्डियोलॉजी एक पोस्टग्रेजुएट सुपरस्पेशलिटी कोर्स है, जो तीन साल का होता है।
निदेशक ने आगे बताया कि डॉ. आरिफ नियमित रूप से ड्यूटी पर आते थे और कोई लगातार अनुपस्थिति नहीं थी। कल शाम को उन्होंने शाम की ड्यूटी पूरी करने के बाद यहां से निकले थे और सुबह का पूरा काम भी कर चुके थे।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दिल्ली विस्फोट मामले में आरिफ का नाम किसी संदिग्ध कनेक्शन के चलते सामने आया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। जांच एजेंसियां उनके बैकग्राउंड, कॉल रिकॉर्ड्स और कानपुर में ठहरने की डिटेल्स की छानबीन कर रही हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस से भी संपर्क किया जा रहा है।
अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि संस्थान में आने वाले सभी छात्रों की सत्यापन प्रक्रिया होती है और आरिफ का प्रवेश पूरी तरह वैध था। फिलहाल, मामले की गहराई से जांच जारी है और कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

