डिजिटल इंडिया 2.0: भारत का नया मीडिया एवं डिजिटल कोड 2026, मीडिया की आज़ादी पर ग्रहण

नई दिल्ली । भारत सरकार ने तेजी से बदलते डिजिटल परिदृश्य, डीपफेक (Deepfakes) के बढ़ते खतरों और सोशल मीडिया के प्रभाव को देखते हुए आईटी (डिजिटल कोड) नियम, 2026 और आईटी संशोधन नियम, 2025-26 के माध्यम से डिजिटल मीडिया और सामग्री विनियमन (Regulation) के एक नए युग की शुरुआत की है।

1. डीपफेक और AI सामग्री पर सख्त नकेल (SGI नियम)

सरकार ने ‘सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन’ (SGI) यानी AI द्वारा बनाई गई सामग्री के लिए बेहद सख्त नियम लागू किए हैं।

  • अनिवार्य लेबलिंग: अब किसी भी AI जनित फोटो, वीडियो या ऑडियो (जैसे डीपफेक) पर स्पष्ट लेबल या वॉटरमार्क होना अनिवार्य है ताकि उपभोक्ता को पता चल सके कि यह असली नहीं है।
  • त्वरित कार्रवाई: यदि कोई आपत्तिजनक AI सामग्री (जैसे अश्लीलता या किसी की पहचान का गलत इस्तेमाल) रिपोर्ट की जाती है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उसे 2 से 36 घंटे के भीतर हटाना होगा।
  • यूजर डिक्लेरेशन: कंटेंट क्रिएटर्स को प्लेटफॉर्म पर अपलोड करते समय यह घोषित करना होगा कि क्या उनका कंटेंट AI द्वारा बनाया गया है।

2. सामग्री का आयु-आधारित वर्गीकरण (Age-Rating System)

डिजिटल कोड 2026 के तहत, ओटीटी (OTT) और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए फिल्मों की तर्ज पर सख्त वर्गीकरण प्रणाली प्रस्तावित है:

  • सामग्री को U, U/A 7+, U/A 13+, U/A 16+, और A (केवल वयस्क) श्रेणियों में बांटना अनिवार्य होगा।
  • पैरेंटल लॉक: 13+ से ऊपर की सामग्री के लिए मजबूत ‘पैरेंटल कंट्रोल’ और ‘एज वेरिफिकेशन’ (आयु सत्यापन) तंत्र लागू करना होगा ताकि बच्चों को हानिकारक कंटेंट से बचाया जा सके।

3. ‘डिजिटल समाचार प्रकाशक’ के दायरे में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स

प्रस्तावित ब्रॉडकास्टिंग सेवा (विनियमन) विधेयक के माध्यम से सरकार ने नियमों का दायरा बढ़ा दिया है:

  • अब केवल बड़े न्यूज चैनल ही नहीं, बल्कि यूट्यूब (YouTube) और इंस्टाग्राम (Instagram) पर समाचार या समसामयिक मुद्दों पर पेशेवर रूप से वीडियो बनाने वाले इन्फ्लुएंसर्स को भी ‘डिजिटल समाचार प्रकाशक’ माना जा सकता है।
  • उन्हें एक कंटेंट इवैल्यूएशन कमेटी (CEC) बनानी होगी जो यह सुनिश्चित करेगी कि सामग्री राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और शालीनता के मानकों का उल्लंघन न करे।

4. जवाबदेही और शिकायत निवारण तंत्र

नया कोड मध्यस्थों (Intermediaries) जैसे फेसबुक, एक्स (Twitter) और व्हाट्सएप की जिम्मेदारी बढ़ाता है:

  • शिकायत अपीलीय समितियां (GAC): यदि कोई यूजर प्लेटफॉर्म के फैसले से खुश नहीं है, तो वह सरकारी समिति के पास अपील कर सकता है।
  • वरिष्ठ स्तर की जवाबदेही: अवैध सामग्री हटाने के निर्देश अब कम से कम ‘संयुक्त सचिव’ स्तर के अधिकारी या ‘डीआईजी’ रैंक के पुलिस अधिकारी द्वारा ही दिए जा सकेंगे, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

5. निषिद्ध सामग्री की विस्तृत सूची

नए कोड में उन विषयों को स्पष्ट किया गया है जिन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ावा नहीं दिया जा सकता:

  • धार्मिक या सांप्रदायिक हिंसा भड़काने वाली सामग्री।
  • महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपमानजनक या अश्लील चित्रण।
  • जानबूझकर फैलाई गई भ्रामक जानकारी (Misinformation) जो देश की संप्रभुता को खतरा पहुंचाती हो। सरकार का उद्देश्य “ओपन, सेफ और ट्रस्टेड” इंटरनेट बनाना है। जहाँ एक ओर ये नियम सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, वहीं डिजिटल एक्टिविस्ट ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ और ‘सेंसरशिप’ की संभावनाओं को लेकर चिंता भी जता रहे हैं।

निष्कर्ष: 2026 का यह नया डिजिटल कोड भारत को दुनिया के उन देशों की कतार में खड़ा करता है जिनके पास AI और डिजिटल मीडिया के लिए सबसे आधुनिक कानूनी ढांचा है। यह तकनीक और नैतिकता के बीच संतुलन बनाने का एक बड़ा हिस्सा है।

 

 

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