एअर इंडिया ड्रीमलाइनर में फ्यूल कंट्रोल स्विच को लेकर डीजीसीए का स्पष्टीकरण, सुरक्षा प्रक्रिया के पालन की पुष्टि

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एअर इंडिया ड्रीमलाइनर में फ्यूल कंट्रोल स्विच को लेकर डीजीसीए का स्पष्टीकरण, सुरक्षा प्रक्रिया के पालन की पुष्टि

DGCA: नई दिल्ली। एअर इंडिया की बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर फ्लाइट में फ्यूल कंट्रोल स्विच से जुड़ी कथित गड़बड़ी को लेकर उठे सवालों पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। नियामक ने पूरी घटना का क्रम जारी करते हुए कहा है कि उड़ान से पहले सभी सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया गया था और विमान के उड़ान भरने में कोई जोखिम नहीं था।

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डीजीसीए के अनुसार, क्रू ने इंजन स्टार्ट के बाद स्विच की फिजिकल जांच की थी और किसी भी स्तर पर असामान्य पैरामीटर या चेतावनी दर्ज नहीं हुई।

क्या थी फ्यूल कंट्रोल स्विच की तकनीकी स्थिति

डीजीसीए ने बताया कि 1 फरवरी को लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर इंजन स्टार्ट के दौरान बाएं इंजन का फ्यूल कंट्रोल स्विच दो बार रन पोजिशन में ठीक से लॉक नहीं हुआ। तीसरी कोशिश में स्विच सही तरीके से लॉक हो गया। इसके बाद क्रू ने आगे की प्रक्रिया शुरू करने से पहले स्विच की भौतिक जांच की और यह सुनिश्चित किया कि वह पूरी तरह रन स्थिति में स्थिर है। इसके बाद ही विमान को उड़ान की अनुमति दी गई।

उड़ान के दौरान नहीं मिला किसी खतरे का संकेत

नियामक के अनुसार, इंजन स्टार्ट के समय और उड़ान के दौरान किसी भी तरह का असामान्य इंजन पैरामीटर, चेतावनी संकेत या सिस्टम मैसेज सामने नहीं आया। क्रू को इस अवलोकन के बारे में अवगत कराया गया था और उन्हें फ्यूल कंट्रोल स्विच से अनावश्यक छेड़छाड़ से बचने के निर्देश दिए गए थे। पूरी उड़ान के दौरान इंजन इंडिकेशन और अलर्ट सिस्टम की लगातार निगरानी की गई और फ्लाइट बिना किसी घटना के सुरक्षित पूरी हुई।

इंजीनियरिंग जांच में क्या सामने आया

डीजीसीए के मुताबिक, बोइंग की सिफारिशों के अनुसार फ्यूल कंट्रोल स्विच की विस्तृत इंजीनियरिंग जांच की गई।
जांच में बाएं और दाएं दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच की अलग-अलग टेस्टिंग की गई, जिसमें दोनों स्विच तकनीकी रूप से संतोषजनक स्थिति में पाए गए। स्विच का लॉकिंग मैकेनिज्म सही ढंग से अपनी जगह पर बैठा हुआ था और स्विच अपने आप रन से कट-ऑफ पोजिशन पर स्लिप नहीं हो रहा था। हालांकि यह भी पाया गया कि गलत दिशा में बाहरी दबाव पड़ने पर स्विच रन से कट-ऑफ की ओर खिसक सकता है, जबकि सही दिशा और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑपरेट करने पर वह पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर रहता है।

डीजीसीए के अतिरिक्त निर्देश

डीजीसीए ने बताया कि बोइंग की गाइडलाइन के अनुसार पुल-टू-अनलॉक फोर्स की भी जांच की गई। यह जांच संबंधित स्विच, बदली जाने वाली यूनिट और अन्य विमानों के स्विच पर भी की गई, जो सभी निर्धारित सीमा के भीतर पाई गई। ये सभी परीक्षण डीजीसीए अधिकारियों की मौजूदगी में किए गए।
नियामक ने एअर इंडिया को निर्देश दिए हैं कि फ्यूल कट-ऑफ स्विच के सही संचालन की प्रक्रिया को सभी क्रू मेंबर्स तक दोबारा स्पष्ट रूप से पहुंचाया जाए।

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एअर इंडिया ने शुरू किया फ्यूल स्विच का री-इंस्पेक्शन

एअर इंडिया ने अपने बोइंग 787 ड्रीमलाइनर बेड़े में लगे फ्यूल कंट्रोल स्विच की दोबारा जांच शुरू कर दी है। एयरलाइन के पास वर्तमान में 33 बोइंग 787 विमान हैं। सूत्रों के अनुसार, एअर इंडिया के फ्लाइट ऑपरेशंस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट मनीष उप्पल ने सभी बोइंग 787 पायलटों को सूचित किया है कि बेड़े के सभी विमानों में फ्यूल कंट्रोल स्विच का री-इंस्पेक्शन किया जा रहा है। साथ ही इंजीनियरिंग टीम ने इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर विस्तृत मूल्यांकन के लिए बोइंग को भेज दिया है।

पहली रिपोर्ट और ग्राउंडिंग से जुड़ा मामला

बताया गया कि बेंगलुरु पहुंचने के बाद एक पायलट ने फ्यूल कंट्रोल स्विच में संभावित खराबी की रिपोर्ट दी थी, जिसके बाद विमान को जांच के लिए ग्राउंड कर दिया गया। डीजीसीए ने यह भी स्पष्ट किया कि एक वीडियो में स्विच को चलाने की गलत प्रक्रिया दिखाई गई थी, जिससे भ्रम की स्थिति बनी।
फ्यूल कंट्रोल स्विच का मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि पिछले वर्ष एअर इंडिया के बोइंग 787-8 हादसे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में टेक-ऑफ के तुरंत बाद फ्यूल सप्लाई कट होने का उल्लेख किया गया था।

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