Delhi’s capital is in a hellish state: देश की राजधानी दिल्ली के किराड़ी इलाके में रहने वाले लोग इन दिनों घुटनों तक गहरे सीवर के गंदे और बदबूदार पानी में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। तापमान 4-5 डिग्री तक गिर चुका है, लेकिन सड़कें और गलियां सीवर के ओवरफ्लो पानी से भरी पड़ी हैं। स्थानीय लोग इसे ‘नरक’ करार दे रहे हैं, जहां बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, दुकानें बंद हो रही हैं और बीमारियां फैल रही हैं।
मीडिया के ग्राउंड रिपोर्ट में देखा गया कि गाड़ियां और दोपहिया वाहन इस गंदे पानी में फंस रहे हैं, जबकि लोग इसी पानी में चलने को मजबूर हैं। बदबू इतनी तेज है कि 5 मिनट खड़े रहना मुश्किल हो जाता है, लेकिन यहां के निवासी यहीं सो रहे हैं, खा रहे हैं और जी रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने अपनी पीड़ा कुछ इस तरह बयां की:
• एक महिला निवासी ने कहा, “साहब, हम यहां कैसे रहते हैं, ये हम ही जानते हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। अगर जाते भी हैं, तो इसी गंदे पानी में गिर जाते हैं। बीमारियां फैल रही हैं, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है।”
• एक बुजुर्ग ने बताया, “ये कोई आज की बात नहीं है। सालों से यही हाल है। विधायक आते हैं, वादे करते हैं और फिर गायब हो जाते हैं। हम टैक्स देते हैं, लेकिन बदले में हमें ये ‘नरक’ मिलता है।”
• एक दुकानदार ने शिकायत की, “मेरी दुकान के सामने इतना पानी भरा है कि कोई ग्राहक नहीं आता। कमाई बंद हो गई है। घर चलाना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन को कई बार बोला, पर कोई सुनवाई नहीं होती।”
रिपोर्टर की ग्राउंड ऑब्जर्वेशन के मुताबिक, यह सीवर का पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर आ गया है, जिससे पूरी दिनचर्या प्रभावित है। सवाल उठता है कि दिल्ली के विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच किराड़ी जैसे इलाकों को उनके हाल पर क्यों छोड़ दिया गया है? प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों की चुप्पी यहां के लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है।
ताजा जानकारी
किराड़ी (विशेषकर शर्मा एनक्लेव और मुबारकपुर दाबास) की यह समस्या नई नहीं है। स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पोस्ट्स के अनुसार, पिछले 8 महीनों से सीवर मिक्स्ड गंदा पानी घरों में घुस रहा है, जिससे बदबू, बीमारियां और जहरीले कीड़े-सांपों का खतरा बढ़ गया है। कई मकान 4 फीट तक धंस चुके हैं। ठंड की लहर में तापमान 4 डिग्री तक गिरने से हालात और बदतर हो गए हैं—लोग गमबूट्स पहनकर चल रहे हैं, बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे और दुकानें बंद पड़ी हैं।
दिल्ली सरकार ने जनवरी 2026 में किराड़ी-रिठाला ट्रंक ड्रेन समेत चार बड़े ड्रेन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, जिनकी लागत करीब 1,000 करोड़ रुपये है। किराड़ी, मुंडका, बवाना और नांगलोई के लिए 4.5 किमी लंबा ट्रंक ड्रेन बनेगा (लागत Rs 220 करोड़), जो 1,520 एकड़ के कैचमेंट एरिया का पानी हैंडल करेगा। काम 2027 तक पूरा होने का लक्ष्य है, लेकिन स्थानीय लोग कह रहे हैं कि यह “बहुत देर” हो चुकी है।
सोशल मीडिया पर वीडियोज और फोटोज वायरल हो रहे हैं, जिसमें राजनीतिक ब्लेम गेम चल रहा है। कुछ यूजर्स AAP सरकार के समय की पुरानी समस्या बता रहे हैं, तो कुछ BJP की MCD पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। दिल्ली कांग्रेस प्रेसिडेंट ने इलाके का दौरा किया, जबकि आम आदमी पार्टी और BJP नेता एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। निवासी बार-बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं मिला।
यह मामला दिल्ली के अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर और ड्रेनेज की पुरानी समस्या को उजागर कर रहा है। प्रशासन से उम्मीद है कि नए प्रोजेक्ट्स से राहत मिलेगी, लेकिन फिलहाल हजारों लोग इस ‘ओपन सीवर’ में जीने को मजबूर हैं।

