शुक्रवार को जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस इंदू मल्होत्रा की बेंच के सामने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस.वी. राजू ने दिल्ली पुलिस की ओर से दलील रखी। उन्होंने कहा,
“ये वे लोग हैं जिनका संविधान के प्रति न के बराबर सम्मान है। सिर्फ़ जमानत के लिए ही ये आर्टिकल 21 (जीवन और निजी स्वतंत्रता का अधिकार) का नाम लेते हैं।”
पाँच साल से ज़्यादा जेल में हैं आरोपी
उमर खालिद सहित कई आरोपी पिछले पाँच साल से अधिक समय से अंडरट्रायल हैं और इसी आधार पर वे जमानत मांग रहे हैं। उनका कहना है कि ट्रायल में देरी पुलिस की वजह से हो रही है। लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसका ठीकरा आरोपियों पर ही फोड़ा। एएसजी राजू ने कहा,
“अगर आरोपी ट्रायल में देरी न करें तो दो साल में मुकदमा पूरा हो सकता है। जानबूझकर देरी कराई जा रही है ताकि इसी आधार पर जमानत ली जा सके।”
कोर्ट रूम में दिखाए गए सीसीटीवी फुटेज
दूसरे दिन भी पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में 2020 दंगों के सीसीटीवी फुटेज दिखाए। इनमें उत्तर-पूर्वी दिल्ली की सड़कों पर भीड़ को लाठी-डंडे इकट्ठा करते और उनकी मजबूती परखते हुए देखा गया। पुलिस का दावा है कि हिंसा सहज या अचानक नहीं हुई, बल्कि पहले से सुनियोजित थी।
पहले दिन कोर्ट में सह-आरोपी शरजील इमाम के भड़काऊ भाषणों के अंश दिखाए गए थे, जिसमें कथित तौर पर नेपाल-बांग्लादेश जैसे देशों की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन की बात की गई थी।
“असम को भारत से अलग करने की साजिश”
पुलिस ने आरोप लगाया कि साजिशकर्ताओं का मकसद था:
• चक्का जाम कर दिल्ली की आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई रोकना
• आर्थिक तंगी पैदा करना
• “असम को भारत से अलग करना” (चोकिंग असम आउट ऑफ इंडिया)
सीसीटीवी कैमरे तोड़े गए ताकि सबूत न रहें
पुलिस ने गवाहों (प्रोटेक्टेड विटनेस) के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि साजिशकर्ता 23 फरवरी 2020 को हुई हिंसा के स्तर से भी नाराज़ थे क्योंकि दंगे वाले डर रहे थे कि सीसीटीवी में सब रिकॉर्ड हो जाएगा। इसके बाद कथित तौर पर फैसला लिया गया कि सारे स्ट्रीट सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए जाएं या खराब कर दिए जाएं। कैमरे नष्ट होने के बाद ही बड़े पैमाने पर दंगे भड़के, जिसमें एक पुलिस कांस्टेबल की हत्या हुई और एक आईबी अधिकारी भी मारा गया।
आतंकी फंडिंग का भी आरोप
पुलिस ने ताहिर हुसैन, खालिद सैफी, मीरान हैदर, इशरत जहां आदि पर “आतंकी फंडिंग” का आरोप लगाया। पुलिस के मुताबिक पुलिस कांस्टेबल की हत्या करने वाला शादाब अहमद भी साजिशकर्ताओं की मीटिंग में शामिल था।
सुप्रीम कोर्ट ने अब मामले की अगली सुनवाई सोमवार को तय की है, जब जमानत याचिकाकर्ताओं की ओर से जवाबी दलीलें पेश की जाएंगी।

