Property Market News: दुनिया भर में राजनीतिक तनाव के बीच प्रोपार्टी बाजार की बात करना भी जरुरी है। दिल्ली, नोएडा ग्रेटर नोएडा औी तमाम एनसीआर में फ्लैट ही फ्लैट बन रहे है। ऐसे में ये बिकेगे या नही सवाल उठने लगे है। खासतौर से लग्जरी सेगमेंट में। रूस-यूक्रेन युद्ध की देर तक जारी और मध्य पूर्व में अस्थिरता (विशेषकर ईरान), और लैटिन अमेरिका में वेनेजुएला जैसी अर्थव्यवस्थाओं का संकट के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर निवेश के झुकाव और संपत्ति बाजारों पर भी दिख रहा है। इन तनावों के चलते निवेशक जोखिम मुक्त परिसंपत्तियों की ओर प्रवृत्त होते हैं, जबकि जोखिमयुक्त सेक्टरों में सावधानी बरतते हैं -और भारत में रियल एस्टेट भी इससे अछूता नहीं है।
भारत में रियल एस्टेट
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर का प्रॉपर्टी मार्केट फिलहाल मजबूत बुनियादी मांग और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे जेवर एयरपोर्ट के कारण कायम है, लेकिन खरीदार सेंटिमेंट पर वैश्विक अस्थिरता और घरेलू आर्थिक संकेत कमजोर पड़ते दिख रहे हैं।
रियल एस्टेट रेट और बिक्री के रुझान
दिल्ली और एनसीआर के प्रमुख क्षेत्रों जैसे नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम में प्रॉपर्टी रेट में वृद्धि जारी है, विशेषकर मिडल और हाई-मिडल सेगमेंट में, लेकिन साथ ही बिक्री की गति सुस्त रही है क्योंकि कीमतों का प्रेशर और वैश्विक आर्थिक जोखिम खरीदारों को सोचने पर मजबूर कर रहा है। अमेरिका की नीतियों को देखते हुए आईटी सेक्टर पर असर पड़ते ही फ्लैट की सेल परचेज पर सीधे असर पड़ने वाला है। दिल्ली-एनसीआर में मध्य-वर्गीय और उच्च-मध्यम वर्ग के घरों की सप्लाई में बढ़ोतरी हुई है, जबकि लग्जरी सेगमेंट में नरमी के संकेत हैं। कुछ रिपोर्टों में लग्जरी प्रॉपर्टी रेट में तेज उछाल देखा गया है, और रेट में प्रमुख शहरों में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की है। इसके विपरीत बिक्री में गिरावट के संकेत भी दिख रहे हैं। क्योंकि दिल्ली-एनसीआर में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9 फीसदी की भारी बिक्री गिरावट दर्ज हुई है, जबकि औसत कीमत लगभग ₹6028 प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गई।
ग्रेटर नोएडा जैसे क्षेत्र अभी बढ़ते प्रोजेक्ट्स और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण निवेशकों और गृह खरीदारों दोनों के लिए आकर्षक बने हुए हैं, और यहां बिल्डर फ्लोर से लेकर 3 बीएचके तक के रेट लगभग ₹8,900-₹12,000 प्रति वर्ग फुट के बीच विविधता दिखाते हैं।
भविष्य का परिदृश्य और संभावित चुनौतियाँ
विश्लेषकों का कहना है कि अगर वैश्विक तनाव लंबे समय तक बना रहता है कृ जैसे कि रूस-यूक्रेन की लंबी जंग, मध्य पूर्व में तनाव, वैश्विक आर्थिक मंदी, इत्यादि- तो विदेशी निवेश और घरेलू निवेश धारणा पर दबाव पड़ सकता है। इससे डेवलपमेंट स्पेंड कम, बिक्री धीमी, और प्रॉपर्टी डील्स पर लेन-देन में देरी जैसी स्थितियाँ देखने को मिल सकती हैं। एक और चुनौती यह भी है कि मिड-इनकम खरीदार धीरे-धीरे पीछे हट रहे हैं क्योंकि कीमतें और होम-लोन कॉस्ट बढ़ रही हैं कृ जिससे बाजार में प्रवास लग्जरी सेगमेंट की ओर बढ़ता दिखता है, लेकिन यह भी वैश्विक जोखिमों के प्रति संवेदनशील है।
एनसीआर प्रॉपर्टी के लिए दीर्घकालीन संकेत
पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली-एनसीआर ने मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, जैसे जेवर एयरपोर्ट और आरआरटीएस जैसी परियोजनाओं के कारण लंबी-अवधि की मांग कायम रखी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर वैश्विक स्थिति में स्थिरता लौटती है, तो दिल्ली-एनसीआर की प्रॉपर्टी की कीमतें फिर से तेजी से उभर सकती हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बुनियादी ढांचे में सुधार और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
प्रॉपर्टी रेट रिकॉर्ड स्तर पर
बता दें कि अभी के दौर में प्रॉपर्टी रेट रिकॉर्ड स्तर पर हैं, और लंबी-अवधि की ग्रोथ के संकेत मौजूद हैं, लेकिन वैश्विक तनाव, कमजोर बिक्री, और उच्च कीमतें जैसे कारक खरीदारों को सतर्क बनाए हुए हैं। दिल्ली-एनसीआर का भविष्य प्रबल विकास की ओर इशारा करता है, मगर यह मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक स्थिरता और घरेलू मांग-संतुलन पर निर्भर करेगा।
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