Delhi-NCR air pollution: वाहनों और धूल को मुख्य दोषी ठहराया, सुप्रीम कोर्ट ने 4 हफ्ते में एक्शन प्लान मांगा

Delhi-NCR air pollution: दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी संबंधित एजेंसियों को कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) की लॉन्ग-टर्म सिफारिशों पर चार हफ्तों के अंदर एक्शन प्लान जमा करने का निर्देश दिया है। CAQM ने कोर्ट को बताया कि क्षेत्र में प्रदूषण के सबसे बड़े कारण वाहनों से उत्सर्जन और सड़क धूल हैं।

कोर्ट का सख्त निर्देश
21 जनवरी को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच (जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली के साथ) ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि CAQM की सिफारिशों पर कोई आपत्ति नहीं सुनी जाएगी। केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, NCR राज्यों (उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान), MCD और अन्य नगर निकायों को सिर्फ एक्शन प्लान और समयसीमा बतानी होगी। कोर्ट ने CAQM और दिल्ली सरकार से पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) के उपयोग पर नई प्रस्ताव भी मांगे हैं।

CAQM की प्रमुख सिफारिशें
CAQM ने विशेषज्ञों (IIT, रिसर्च संस्थानों और NGO से) की मदद से 15 लॉन्ग-टर्म उपाय सुझाए हैं, जिनमें शामिल हैं:
• प्रदूषण करने वाले पुराने वाहनों को समयबद्ध तरीके से फेज आउट करना
• PUC (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) व्यवस्था को मजबूत करना और रिमोट सेंसिंग से निगरानी
• इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी में संशोधन और चार्जिंग इंफ्रा का तेज विस्तार
• मेट्रो और रेल नेटवर्क का ऑगमेंटेशन
• किसानों को मुफ्त हैपी सीडर मशीनें उपलब्ध कराना (पराली जलाने से रोकने के लिए)
• MCD टोल प्लाजा को ट्रैफिक जाम कम करने के लिए शिफ्ट करना
• सड़क धूल नियंत्रण के लिए ULB और रोड ओनिंग एजेंसियों की जिम्मेदारी बढ़ाना

वर्तमान स्थिति: AQI अभी भी ‘वेरी पूअर’
आज सुबह दिल्ली का औसत AQI 350-377 के बीच ‘वेरी पूअर’ कैटेगरी में दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण है। कई इलाकों में AQI 400 के पार ‘सीवियर’ स्तर पर पहुंच गया। GRAP के स्टेज-4 प्रतिबंध हाल ही में हटाए गए हैं, लेकिन स्टेज-1 से 3 के उपाय जारी हैं।

कोर्ट ने पहले CAQM की कार्यशैली पर नाराजगी जताई थी और विशेषज्ञों से मुख्य कारणों की पहचान कराने को कहा था। अब ये सिफारिशें उसी प्रक्रिया का नतीजा हैं। सभी पक्षों से पूर्ण सहयोग की अपील की गई है, ताकि यह सालाना संकट स्थायी रूप से खत्म हो सके। मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।

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