दुर्घटना लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज के पास हुई थी। पुलिस के अनुसार SUV ने विपरीत दिशा से आ रही साहिल की बाइक को टक्कर मारी और फिर पार्क की गई टैक्सी से भी टकरा गई। साहिल मौके पर ही मृत घोषित कर दिए गए, जबकि टैक्सी ड्राइवर अजीत सिंह को अस्पताल ले जाया गया। पिता का माफी का बयान आरोपी किशोर के पिता ने मीडिया से बातचीत में गहरे दुख और शर्म का इजहार करते हुए कहा, “यह गंभीर गलती थी, बहुत-बहुत खेद है।” उन्होंने बताया कि परिवार गहरे सदमे में है और उन्हें अपने बेटे की हरकत पर बहुत शर्मिंदगी है। “मैं बहुत शर्मिंदा हूं।” पिता उस समय गोरखपुर में काम पर थे और दावा किया कि बेटे ने “नादानी” में कार की चाबी ले ली। “अगर मैं दिल्ली में होता तो शायद यह घटना न होती। घर में मां थीं और नादानी में उसने गलती कर दी। जब मैं घर पर होता हूं तो सख्त माहौल बनाकर रखता हूं।”
पिता ने साहिल की मां को संदेश दिया, “मैं अपनी पूरी जिंदगी उनकी माफी मांगते हुए बिताऊंगा।” उन्होंने कहा कि कुछ भी सच्चाई को नहीं बदल सकता और वे पीड़िता के दर्द को समझते हैं। आरोपी के भाई ने भी पुष्टि की कि भाई ने दुर्घटना के बाद भागने की कोशिश नहीं की, बल्कि अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी। पीड़ित मां का गुस्सा और सवाल साहिल की मां इन्ना माकन (एकल मां) ने मीडिया से बातचीत में व्यवस्था की जमकर आलोचना की। उन्होंने बताया, “मेरा बच्चा सड़क पर लगभग दो घंटे पड़ा रहा। एंबुलेंस वहां खड़ी थी, लेकिन उसे अस्पताल नहीं ले गए।” उन्होंने इंदिरा गांधी अस्पताल की सुविधाओं पर भी सवाल उठाए, “वहां कोई मशीनरी नहीं, न सही डॉक्टर, न सर्जन—कुछ भी नहीं है।”
मां ने किशोर आरोपी को क्लास 10 की बोर्ड परीक्षा के लिए अंतरिम जमानत दिए जाने पर नाराजगी जताई और पूछा, “यह अपराध जमानती क्यों है? आरोपी के पिता को क्यों नहीं गिरफ्तार किया गया?” उन्होंने बताया कि SUV पर 13 ओवर-स्पीडिंग के लंबित चालान थे। मां ने यह भी कहा कि दुर्घटना के बाद लोग मदद करने की बजाय वीडियो बना रहे थे। सोशल मीडिया पर धमकियां मिलने के बावजूद इन्ना माकन ने कहा कि वे कोई मुआवजा नहीं चाहतीं, बल्कि हिट-एंड-रन मामलों में सख्त कानून और बदलाव चाहती हैं ताकि ऐसे पीड़ित परिवारों को न्याय मिले। उन्होंने मांग की कि नाबालिगों के माता-पिता की भी जवाबदेही तय हो।
कानूनी स्थिति किशोर आरोपी को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया गया और उसे ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया गया। मंगलवार (17 फरवरी 2026) को उसे परीक्षा लिखने के लिए अंतरिम राहत दी गई है। दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच जारी रखी है। यह घटना एक बार फिर नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने, सोशल मीडिया रील्स के चक्कर में लापरवाही और सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रही है। पीड़ित परिवार न्याय की लड़ाई लड़ रहा है, जबकि आरोपी परिवार सदमे और शर्म में जी रहा है।

