रैली में ममता ने भीड़ से कहा, “अगर आपका नाम कट गया, तो केंद्रीय सरकार को भी काट दो।” उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बांग्लादेशी नागरिकों को मतदाता सूची से हटाने का उद्देश्य है, तो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे भाजपा शासित राज्यों में यह अभियान क्यों चलाया जा रहा है? उन्होंने कहा, “पीएम मोदी को 2024 में इसी मतदाता सूची के आधार पर वोट मिले थे। फिर इतनी जल्दबाजी क्यों? मैं यहां रहते हुए किसी को भी बाहर नहीं फेंकने दूंगी। भाजपा मुझे राजनीतिक रूप से हरा नहीं सकती।” ममता ने ईसी को ‘बीजेपी कमीशन’ करार देते हुए कहा कि ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद लोग इसका ‘आपदा’ महसूस करेंगे।
हालांकि, ममता ने शर्त के साथ समर्थन का ऐलान किया। उन्होंने कहा, “अगर एसआईआर को दो-तीन साल में पारदर्शी तरीके से किया जाए, तो हम हर संसाधन के साथ इसका समर्थन करेंगे।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई भी वैध मतदाता का नाम कटा, तो भाजपा सरकार का पतन हो जाएगा। रैली के बाद ममता चंदपाड़ा से ठाकुरनगर तक 3 किलोमीटर की पैदल यात्रा का नेतृत्व करेंगी, जो मटुआ समुदाय का आध्यात्मिक केंद्र है।
यह विवाद तब भड़का जब ईसी ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का दूसरा चरण शुरू किया, जिसमें पश्चिम बंगाल भी शामिल है। पहला चरण बिहार में चुनावों से पहले पूरा हुआ था। अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी 2026 को जारी होगी। ममता ने पहले भी 20 नवंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर अभियान रोकने की मांग की थी, जिसमें उन्होंने इसे ‘अनियोजित, अराजक और खतरनाक’ बताया।
उन्होंने बूथ लेवल ऑफिसरों (बीएलओ) पर दबाव, सर्वर समस्याओं और अपर्याप्त प्रशिक्षण की शिकायत की, जिससे दो बीएलओ की आत्महत्या तक हो गई।
ममता ने सोमवार को एक और पत्र में ईसी से डेटा एंट्री के आउटसोर्सिंग और प्राइवेट हाउसिंग सोसाइटियों में वोटिंग बूथ लगाने पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह ‘वेस्टेड इंटरेस्ट’ को पूरा करने का प्रयास है। उन्होंने कहा, “यह राजनीतिक दल के इशारे पर हो रहा है।”
भाजपा का पलटवार
‘तुष्टिकरण की राजनीति’ करार दिया। राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि ममता ‘घुसपैठियों’ को वोट बैंक बनाने के डर से डरी हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार में एसआईआर सफल रहा, जहां लाखों फर्जी वोटर हटाए गए। भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “ममता संविधानिक संस्था पर हमला कर रही हैं। वह मृत, फर्जी और अवैध वोटरों को बचाना चाहती हैं।” भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट किया, “टीएमसी वर्षों से अवैध घुसपैठ से फायदा उठा रही थी। अब एसआईआर से साफ हो रहा है, इसलिए घबराहट है।”
कांग्रेस नेता उदित राज ने भी कहा कि भाजपा बंगाल चुनाव को बिहार की तरह बिगाड़ना चाहती है। टीएमसी ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ता बैंक कर्मचारियों के वेश में डेटा इकट्ठा कर रहे हैं।
यह विवाद 2026 चुनावों से पहले राजनीतिक तनाव को और बढ़ा रहा है। ममता ने कहा, “अगर मुझे निशाना बनाया गया, तो मैं पूरे देश में यात्रा कर भाजपा की नींव हिला दूंगी।” ईसी ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अभियान जारी है।

