New Delhi news क्राइम ब्रांच ने पाकिस्तान-नेपाल-बांग्लादेश से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी के नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 10 आरोपियों को दिल्ली के वॉल्ड सिटी (पुरानी दिल्ली) इलाके से गिरफ्तार किया है। मॉड्यूल के तार पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश से जुड़े हुए थे।
पुलिस ने आरोपियों के पास से 21 घातक विदेशी हथियार और 200 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। बरामद हथियारों में चेक रिपब्लिक निर्मित सब-मशीन गन, तुर्की की स्टोजर, चीन की पीएक्स -3, इटली की बरेटा, ब्राजील की टॉरस और जर्मनी की वाल्थर पिस्तौलें और विशेष रूप से पीएक्स-5.7 पिस्तौल बरामद किया है। जिसका उपयोग आमतौर पर केवल स्पेशल फोर्सेज करती हैं।
दिल्ली अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त संजीव कुमार यादव ने बताया कि क्राइम ब्रांच की एंटी रॉबरी स्नैचिंग सेल के इंस्पेक्टर मान सिंह के सुपरविजन में इंस्पेक्टर सुंदर गौतम और अन्यों की टीम ने तकनीकी निगरानी से संदिग्धों के कॉल रिकॉर्ड्स खंगाले। मुखबिरों की मदद से उनकी मूवमेंट का महीनों तक विश्लेषण किया गया। इसके बाद 13-14 मार्च को पुख्ता सूचना के आधार पर छापेमारी कर गिरोह के सदस्यों को पकड़ लिया। पुलिस पूछताछ में आरोपियों की पहचान राहिल, हाशिम, सैम, सोनू गुप्ता, घनश्याम, वसीम, निशांत, नवाब, नौमान और नौशाद के रूप में हुई है।
पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते भारत में होती थी एंट्री
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया किया है कि इस मॉड्यूल का मास्टरमाइंड शाहबाज अंसारी (बुलंदशहर, यूपी निवासी) है। वह पाकिस्तान से हथियार मंगवाता था, जिन्हें नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं के जरिए भारत में तस्करी कर लाया जाता था। इन आधुनिक हथियारों की सप्लाई दिल्ली-ठउफ और उत्तर भारत के खूंखार अपराधी गिरोहों को की जानी थी।
पुरानी दिल्ली की तंग गलियों को बनाया था ‘सेफ हाउस’
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी जामा मस्जिद और अजमेरी गेट जैसे घनी आबादी वाले इलाकों का इस्तेमाल हथियारों को छिपाने और ट्रांजिट जोन के रूप में कर रहे थे। ये लोग पकड़े जाने से बचने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स, वीओआईपी कॉल्स और बार-बार सिम कार्ड बदलने का सहारा लेते थे। पैसों का लेनदेन पूरी तरह हवाला नेटवर्क के जरिए किया जाता था।
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