चीफ जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया (BeerBiceps) और कॉमेडियन समय रैना के शो ‘India’s Got Latent’ में कथित अश्लील और दिव्यांगों का मज़ाक उड़ाने वाले कंटेंट पर चल रहे मामलों की सुनवाई कर रही थी।
कोर्ट के प्रमुख सुझाव
1. ऑनलाइन कंटेंट के लिए आधार कार्ड या पैन नंबर से उम्र सत्यापन अनिवार्य किया जाए।
कोर्ट ने कहा, “वीडियो शुरू होने से पहले सिर्फ़ 2 सेकंड की वार्निंग से कुछ नहीं होता। पहले आधार/पैन डालकर उम्र साबित करो, फिर कंटेंट खुले।”
2. सेल्फ-रेगुलेशन काम नहीं कर रहा। एक स्वतंत्र रेगुलेटरी बॉडी बननी चाहिए जो न तो सरकार के नियंत्रण में हो और न ही प्लेटफ़ॉर्म मालिकों के।
3. दिव्यांगों का मज़ाक उड़ाने पर SC-ST एक्ट जैसा सख़्त क़ानून लाने पर विचार हो।
सरकार ने कोर्ट को बताया नया प्लान
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा देकर बताया कि वह IT रूल्स-2021 में बड़े बदलाव करने जा रही है। मुख्य प्रस्ताव:
• सारी डिजिटल सामग्री (यूट्यूब, इंस्टाग्राम, OTT, न्यूज़ पोर्टल सब) के लिए सिनेमाघरों जैसी रेटिंग लागू होगी:
U, U/A 7+, U/A 13+, U/A 16+, A (केवल वयस्क)
• अश्लीलता की नई परिभाषा दी जाएगी – अगर कोई कंटेंट “कामुक है, व्यभिचार की भावना जगाता है या लोगों को भ्रष्ट करने की क्षमता रखता है” तो उसे अश्लील माना जाएगा।
• राष्ट्र-विरोधी कंटेंट पर पूरी तरह प्रतिबंध।
• महिलाओं का ऑब्जेक्टिफिकेशन, अपमानजनक चित्रण, हानिकारक स्टीरियोटाइप बिल्कुल प्रतिबंधित।
• दिव्यांगों को नीचा दिखाने, बच्चों को नुक़सान पहुँचाने वाली सामग्री पर सख़्त पाबंदी।
• कम्युनिटी स्टैंडर्ड टेस्ट लागू होगा (जैसा Aveek Sarkar केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था) – यानी आज के समाज का सामान्य व्यक्ति उसे अश्लील माने या नहीं।
सरकार और कोर्ट दोनों सहमत
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “आज कोई भी अपना यूट्यूब चैनल खोल लेता है और कुछ भी डाल देता है। आज की समस्या सिर्फ़ अश्लीलता नहीं, विकृत मानसिकता (perversity) है। 10 साल के बच्चे हमसे ज़्यादा टेक-सेवी हैं और सब देख लेते हैं।”
कोर्ट ने कहा, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बहुत कीमती है, लेकिन इसके नाम पर विकृति नहीं चल सकती।”
OTT प्लेटफ़ॉर्म्स का पक्ष
नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो आदि की संस्था IBDF ने कहा कि वे पहले से ही रेटिंग और वार्निंग दे रहे हैं, लेकिन ये नियम अभी दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती के घेरे में हैं।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जनवरी में रखी है और सरकार से कहा है कि तब तक नए नियमों का ड्राफ्ट तैयार कर ले।
यह मामला आने वाले समय में यूट्यूब, इंस्टाग्राम, OTT और सभी डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है।

