कोर्ट ने कहा, “आप अभिनेता हैं, लाखों लोगों पर आपका प्रभाव है। इसलिए जिम्मेदार रहें। मिमिक्री कर सकते हैं, लेकिन किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचा सकते। सार्वजनिक मंच पर खड़े होकर किसी देवता की नकल इतनी हल्के में नहीं ली जा सकती। यह क्षेत्र की पवित्र परंपरा है, इसे हल्का नहीं समझा जा सकता।” जज ने इसे “gross ignorance” (गंभीर अज्ञानता) करार दिया।
विवाद क्या था?
घटना पिछले साल गोवा में आयोजित 56वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) के दौरान हुई। रणवीर सिंह ने ‘कांतारा चैप्टर 1’ की तारीफ करते हुए रिशभ शेट्टी द्वारा निभाए गए दैव चरित्र की पजेशन वाली नकल की। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने कुछ इशारे और टिप्पणियां कीं, जिन्हें तटीय कर्नाटक की पवित्र ‘चावुंडी दैव’ या ‘भूतकोला’ परंपरा का अपमान माना गया।
इस पर बेंगलुरु के हाई ग्राउंड्स पुलिस स्टेशन में जनवरी 2026 में वकील प्रशांत मेथल की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 299 और 302 लगाई गई हैं।
रणवीर का पक्ष रणवीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर रद्द करने की मांग की। उनके वरिष्ठ वकील साजन पूवय्या ने कोर्ट को बताया कि मिमिक्री “पूरी तरह असंवेदनशील” थी, लेकिन जानबूझकर अपमान करने का इरादा नहीं था। अभिनेता किसी भी तरह की गलती सुधारने को तैयार हैं। कोर्ट का फैसला आज की सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर आपत्तियां मांगी हैं। रणवीर सिंह के खिलाफ 2 मार्च 2026 तक कोई जबरन कार्रवाई (coercive action) नहीं होगी। मामले की अगली सुनवाई 2 मार्च को होगी, जब कोर्ट इरादे (mens rea) की जांच करेगा।

