नोएडा।नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (NMRC) के आधिकारिक कैलेंडर पर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एवं NMRC के एमडी लोकेश एम. तथा प्राधिकरण के एसीईओ एवं NMRC के कार्यकारी एमडी महेंद्र प्रसाद की तस्वीरें लगाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले ने प्रशासनिक हलकों में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किसी सरकारी उपक्रम के कैलेंडर या प्रचार सामग्री पर नौकरशाहों की तस्वीर लगाना नियमों के अनुरूप है या नहीं।
कैलेंडर से शुरू हुआ विवाद
सूत्रों के अनुसार NMRC द्वारा जारी किए गए कैलेंडर में शीर्ष अधिकारियों की तस्वीरें प्रमुख रूप से प्रकाशित की गईं। इसके सामने आने के बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया कि सरकारी धन से छपने वाले कैलेंडर, ब्रोशर या अन्य प्रचार सामग्री में अधिकारियों की व्यक्तिगत तस्वीरें लगाना प्रशासनिक मर्यादा और नियमों के दायरे में आता है या नहीं। कुछ कर्मचारी संगठनों और प्रशासनिक जानकारों ने इसे नियमों के खिलाफ बताया, जबकि कुछ का कहना है कि पदेन प्रमुख होने के नाते ऐसा किया गया।
सरकारी प्रचार सामग्री को लेकर क्या कहते हैं नियम
सामान्य तौर पर केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि सरकारी धन से तैयार होने वाली प्रचार सामग्री, कैलेंडर, पोस्टर या विज्ञापनों में व्यक्तिगत प्रचार से बचा जाना चाहिए।
नियमों के अनुसार—
- सरकारी प्रकाशनों में योजनाओं, परियोजनाओं और संस्थान की पहचान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- नौकरशाहों या अधिकारियों की तस्वीरें केवल तभी लगाई जा सकती हैं, जब वह औपचारिक आवश्यकता या कार्यक्रम से सीधे जुड़ीहों।
- नियमित रूप से छपने वाले कैलेंडर या सामान्य प्रचार सामग्री में अधिकारियों की तस्वीरों को अनावश्यक माना जाता है।
नौकरशाह बनाम संस्थान की पहचान
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि NMRC जैसे सार्वजनिक उपक्रमों की पहचान किसी एक अधिकारी से नहीं, बल्कि संस्था और उसकी सेवाओं से होनी चाहिए। कैलेंडर पर अधिकारियों की तस्वीरें लगाने से यह संदेश जा सकता है कि सरकारी मंच का उपयोग व्यक्तिगत छवि निर्माण के लिए किया जा रहा है, जो सुशासन की भावना के विपरीत है।
क्या हो सकती है आगे की कार्रवाई
यदि इस मामले को औपचारिक शिकायत या जांच के दायरे में लाया जाता है, तो संबंधित विभाग यह देख सकता है कि कैलेंडर छापने में किन नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन किया गया। जरूरत पड़ने पर भविष्य में ऐसे कैलेंडरों के डिज़ाइन और सामग्री को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जा सकती है, ताकि किसी तरह का विवाद दोबारा न हो।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि NMRC कैलेंडर पर लोकेश एम. और महेंद्र प्रसाद की तस्वीरों को लेकर उठा विवाद केवल एक कैलेंडर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता, मर्यादा और नियमों के पालन से जुड़ा बड़ा सवाल है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्राधिकरण इस पर क्या रुख अपनाता है और क्या भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाती है।

