Controversy erupts over Noida Authority’s transfer policy: नोएडा अथॉरिटी में ट्रांसफर और डेपुटेशन नीति को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। अथॉरिटी की एजीएम (इंडस्ट्री) प्रिया सिंह का डेपुटेशन पीरियड अक्टूबर 2022 में ही समाप्त हो चुका था, लेकिन वे अभी भी उसी पद पर तैनात हैं। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया और कुछ न्यूज चैनलों पर बड़ा खुलासा हुआ है, जिससे अथॉरिटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
मामला क्या है?
• प्रिया सिंह को वर्ष 2019 में कानपुर से नोएडा अथॉरिटी में डेपुटेशन पर भेजा गया था।
• नियमों के अनुसार, उनका डेपुटेशन पीरियड अक्टूबर 2022 में खत्म हो गया था लेकिन, इसके बावजूद पिछले तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर भी उन्हें मूल विभाग में वापस नहीं भेजा गया और वे एजीएम इंडस्ट्री के पद पर बनी हुई हैं।
• हाल ही में न्यूज चैनल और सोशल मीडिया पर इसकी रिपोर्टिंग हुई, जिसमें इसे ट्रांसफर पॉलिसी के उल्लंघन का मामला बताया जा रहा है।
क्यों उठ रहे सवाल?
उत्तर प्रदेश सरकार और विकास प्राधिकरणों की डेपुटेशन नीति में स्पष्ट प्रावधान हैं कि डेपुटेशन की अधिकतम अवधि पूरी होने के बाद अधिकारी को मूल कैडर में वापस भेजा जाना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अनावश्यक विस्तार या अनदेखी से पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं और अन्य अधिकारियों में असंतोष पैदा होता है। इस मामले में प्रिया सिंह के पद पर बने रहने को विशेष सुविधा या प्रभाव का मामला बताया जा रहा है।
अथॉरिटी का पक्ष
नोएडा अथॉरिटी की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच हो सकती है, लेकिन फिलहाल कोई कार्रवाई की खबर नहीं है।
वर्तमान स्थिति
यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब नोएडा अथॉरिटी पहले से ही विभिन्न मुद्दों जैसे बिल्डरों के बकाया, अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर सुर्खियों में रही है। इस नए विवाद से एक बार फिर प्राधिकरण की कार्यशैली पर उंगलियां उठ रही हैं। विशेषज्ञों की मांग है कि सरकार स्तर पर डेपुटेशन और ट्रांसफर पॉलिसी का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

