इस मामले में मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री और इंदौर के वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के बयान ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। मंत्री जब प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर रहे थे और मीडिया ने मौतों की संख्या व व्यवस्थाओं पर सवाल किए, तो वे भड़क गए। एक वायरल वीडियो में वे मीडिया कर्मी से तीखी बहस करते नजर आए और विवादास्पद शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसे सोशल मीडिया पर “घंटा” जैसे संदर्भ में देखा गया। इससे जनता और विपक्ष में आक्रोश भड़क उठा। महिलाओं ने मंत्री को घेरा भी लिया।
हालांकि, बाद में कैलाश विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया पर माफी मांग ली। उन्होंने अपने X हैंडल पर पोस्ट किया: “मैं और मेरी टीम पिछले दो दिनों से बिना सोए प्रभावित क्षेत्र में लगातार स्थिति सुधारने में जुटी हुई है। दूषित पानी से मेरे लोग पीड़ित हैं और कुछ हमें छोड़कर चले गए, इस गहरे दुःख की अवस्था में मीडिया के एक प्रश्न पर मेरे शब्द गलत निकल गए। इसके लिए मैं खेद प्रकट करता हूँ। लेकिन जब तक मेरे लोग पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ नहीं हो जाते, मैं शांत नहीं बैठूँगा।”
मंत्री ने पहले कुछ मौतों को “नेचुरल” बताया था, लेकिन बाद में जांच और मुआवजे का आश्वासन दिया। उन्होंने पीड़ित परिवारों को 2 लाख रुपये के चेक भी वितरित किए। सरकार की ओर से दूषित पानी के स्रोत को ठीक करने और माइक्रो-लेवल जांच के निर्देश दिए गए हैं।
विपक्षी कांग्रेस ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मौतों की वास्तविक संख्या छिपाने और कुप्रबंधन का आरोप लगाया। उन्होंने दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई की मांग की और कहा कि सरकार जनता की जान से खिलवाड़ कर रही है। कांग्रेस ने प्रदर्शन भी किए।
सरकारी स्तर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई हुई है। तीन अधिकारियों को निलंबित और एक को बर्खास्त किया गया है। प्रभावित इलाके में वैकल्पिक पानी की व्यवस्था की जा रही है और सभी पानी के स्रोतों की जांच चल रही है।
यह घटना इंदौर जैसे शहर के लिए बड़ा झटका है, जहां स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। प्रशासन का दावा है कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन स्थानीय लोग अभी भी दहशत में हैं। मामले की आगे जांच जारी है।

