बढ रही सांप्रदायिकताः देश में मोहम्मद दीपक की कमी नही, ऐसे फेल हो रहे एंजेडे

वैसे तो देश भर में सांप्रदायिकता फैलाने में कोई कसर नही छोड़ी जा रही है। जहां भी मौका मिलता है वहां कुछ संगठनों के लोग मारपीट तक करते नजर आते है। हाल ही उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में 70 साल के मुस्लिम दुकानदार को धमका रही भीड़ का सामना करने वाले दीपक की देशभर में सरहाना की जा रही है। बुजुर्ग से बदसलूकी कर रहे युवकों का सामने करने वाले दीक की वीडियो जमकर वायरल हुई है। खास बात ये रही कि पुलिस पूरे घटनाक्रम में मूकदर्शक बनी दिख रही है।

दरअसल, दीपक कुमार 26 जनवरी को अपने दोस्त की दुकान पर थे, जब उन्होंने कुछ लोगों को बगल के दुकानदार वकील अहमद को दुकान के नाम में बाबा इस्तेमाल करने पर डांटते और धमकाते हुए सुना। इस बारे में पूछने पर, इलाके में जिम चलाने वाले दीपक कुमार से कहा गया कि वे बीच में न आएं।
घटना के एक वीडियो में, कुमार भीड़ से भिड़ते हैं और पूछते हैं कि दूसरे लोग अपनी दुकानों का नाम बाबा क्यों रख सकते हैं लेकिन अहमद क्यों नहीं। वह भीड़ से पूछते हैं, दुकान 30 साल पुरानी है, क्या आप इसका नाम बदलेंगे? उनका नाम पूछने पर, दीपका कुमार जवाब देते हैं, मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।

इस घटना को आधार बनाकर उग्र भीड़ ने न केवल प्रदर्शन किया, बल्कि कई मुस्लिम व्यापारियों की दुकानों में तोड़फोड़ की कोशिश की। उन्हें क्षेत्र छोड़ने की धमकियां दीं। यह पैटर्न उत्तराखंड के पुरोला और हल्द्वानी की पिछली घटनाओं से मिलता-जुलता है, जहाँ लैंड जिहाद या लव जिहाद जैसे नैरेटिव के तहत पूरे समुदाय को आर्थिक और सामाजिक रूप से बहिष्कृत करने की कोशिश की गई।

उत्तर प्रदेशः बुलडोजर कार्रवाई और पहचान का संकट
देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों को टारगेट करने का तरीका अक्सर प्रशासनिक कार्रवाइयों के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। प्रयागराज, कानपुर और लखनऊ जैसे शहरों में विरोध प्रदर्शनों के बाद बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के बुलडोजर न्याय के नाम पर घर गिराए जाने की खबरें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहीं। इसके अलावा, कांवड़ यात्रा के दौरान दुकानों पर श्नाम की पट्टिकाश् लगाने वाले हालिया आदेशों को भी समुदाय को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के प्रयास के रूप में देखा गया।

हरियाणा और नूंहः सांप्रदायिक दंगों के बाद की मार
हरियाणा के नूंह और गुरुग्राम में हुई हिंसा के बाद एक खास समुदाय को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया गया। हिंसा के बाद हुई पुलिसिया कार्रवाई में एक पक्षीय गिरफ्तारी के आरोप लगे और नूंह में सैकड़ों झुग्गियों और दुकानों को अवैध बताकर ढहा दिया गया। दक्षिण हरियाणा के इन इलाकों में मुस्लिम प्रवासियों (खासकर कबाड़ का काम करने वालों या मजदूरों) को डरा-धमकाकर भगाए जाने की कई घटनाएं सामने आईं।

मध्य प्रदेश और राजस्थानः धार्मिक उत्सवों पर बढ़ता तनाव
मध्य प्रदेश के खरगोन और उज्जैन जैसे शहरों में रामनवमी या अन्य धार्मिक जुलूसों के दौरान हुई झड़पों के बाद मुस्लिम इलाकों में भारी नुकसान देखा गया। यहाँ भी श्तत्काल न्यायश् के तहत संपत्तियों का ध्वस्तीकरण मुख्य हथियार बना। राजस्थान के भीलवाड़ा और जोधपुर में भी छिटपुट घटनाओं को सांप्रदायिक रंग देकर मुस्लिम मोहल्लों में भय का माहौल बनाने की कोशिशें दर्ज की गई हैं।

आर्थिक बहिष्कार और हेट स्पीच का नया टूल
देश भर में एक नया और खतरनाक ट्रेंड श्आर्थिक बहिष्कारश् का उभरा है। सोशल मीडिया और धर्म संसदों के माध्यम से खुलेआम अपील की जाती है कि मुस्लिम रेहड़ी-पटरी वालों या कारीगरों से सामान न खरीदा जाए। यह प्रवृत्ति केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण के कर्नाटक जैसे राज्यों में भी हिजाब विवाद और मंदिरों के पास मुस्लिम व्यापारियों पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों के रूप में देखी गई है।

 

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