Communal violence continues in Manipur: कुकी-जो विधायकों के सरकार में शामिल होने पर बवाल, पुतले फूंके, झड़पें, शटडाउन; विधायक बोले- ‘शांति के लिए जरूरी, समाधान टेबल पर होगा’

Communal violence continues in Manipur: मनिपुर में जातीय संघर्ष के बीच नई सरकार के गठन के बाद कुकी-जो समुदाय के तीन विधायकों के शामिल होने पर भारी विरोध हो रहा है। चुराचांदपुर, कांगपोकपी और अन्य पहाड़ी जिलों में प्रदर्शनकारियों ने इन विधायकों के पुतले फूंके, कुल शटडाउन किया और सुरक्षा बलों से झड़पें भी हुईं। इस बीच, एक विधायक ने कहा कि सरकार में शामिल होना समुदाय की मांगों से समझौता नहीं है, बल्कि शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का कदम मात्र है।

विरोध और हिंसा की घटनाएं
चुराचांदपुर जिले में शुक्रवार को बड़े प्रदर्शन हुए, जहां कुकी महिलाओं की मानवाधिकार संगठन सहित कई ग्रुप्स ने रैलियां निकालीं। प्रदर्शनकारियों ने भाजपा विधायकों नेमचा किपगेन (नई डिप्टी सीएम), एलएम खाउते और नगुरसांगलुर सनाते के पुतले जलाए। कुकी-जो काउंसिल ने इन विधायकों का सामाजिक बहिष्कार घोषित किया है और इसे “मीतई-प्रभुत्व वाली सरकार” में शामिल होना “समुदाय के साथ विश्वासघात” बताया है।

पिछले दो दिनों में चुराचांदपुर में हिंसा भड़की, जिसमें पथराव, टायर जलाने और सुरक्षा बलों पर हमले हुए। सुरक्षा बलों ने आंसू गैस और लाठीचार्ज किया, जिसमें कई लोग घायल हुए। कांगपोकपी और अन्य इलाकों में भी विरोध प्रदर्शन हुए। कुकी संगठनों का कहना है कि अलग प्रशासन की मांग चल रही है और सरकार में शामिल होना सामुदायिक हितों के खिलाफ है।

विधायक नगुरसांगलुर सनाते का पक्ष
टिपाइमुख से भाजपा विधायक नगुरसांगलुर सनाते (हमार जनजाति से) ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा, “यह फैसला शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए लिया गया है। लोग पीड़ित हैं, कई अपने गांवों में नहीं लौट पाए। रोजी-रोटी के लिए शांति जरूरी है। अलग प्रशासन की मांग चल रही है, एसओओ ग्रुप्स (यूपीएफ और केएनओ) भारत सरकार से बात कर रहे हैं, वह प्रक्रिया जारी रहेगी। लेकिन हम इंतजार नहीं कर सकते; शांति, विकास और लोगों की घर वापसी चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “सरकार में शामिल होना आत्मसमर्पण नहीं है। नागा वार्ता भी दशकों से चल रही है, लेकिन क्या नागा लोग कहें कि समाधान तक कोई सरकार नहीं होगी? सरकार लोगों की देखभाल के लिए होनी चाहिए। विधानसभा चलनी चाहिए। हमारी मांग जारी रहेगी, लेकिन दोनों चीजें साथ-साथ हो सकती हैं। किसी समस्या का समाधान बंदूकों से नहीं, टेबल पर बातचीत से होता है।”

सनाते ने कहा कि उनका फैसला समुदाय और समर्थकों से विचार-विमर्श के बाद लिया गया। हमार समुदाय के संगठनों ने उनका समर्थन किया है और उन्हें धमकी देने वालों को चेतावनी दी है। जोमी काउंसिल जैसे कुछ ग्रुप्स ने भी सामाजिक बहिष्कार का विरोध किया है, जिससे कुकी-जो समुदाय में आंतरिक मतभेद सामने आए हैं।

नई सरकार और पृष्ठभूमि
युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में नई भाजपा सरकार का गठन हाल ही में हुआ, जिसके बाद राष्ट्रपति शासन हटा। नेमचा किपगेन को डिप्टी सीएम बनाया गया। तीनों कुकी-जो विधायक बुधवार को इंफाल पहुंचे और शपथ ग्रहण में शामिल हुए—मई 2023 में जातीय संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार। मनिपुर में 10 कुकी-जो विधायक हैं, जिनमें 7 भाजपा के।

फ्लोर टेस्ट में सरकार पास हुई, लेकिन कुकी विधायक फिजिकली मौजूद नहीं थे। संघर्ष में अब तक 260 से ज्यादा मौतें हुईं और 62,000 लोग विस्थापित हैं। कुकी-जो समुदाय अलग प्रशासन चाहता है, जबकि मीतई समुदाय इसका विरोध करता है। केंद्र सरकार शांति की उम्मीद कर रही है, लेकिन तनाव बना हुआ है।

मनिपुर की स्थिति नाजुक बनी हुई है। क्या नई सरकार शांति बहाल कर पाएगी या विरोध और बढ़ेगा—यह देखना बाकी है।

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