CMS COP15: प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण के लिए वैश्विक प्रयास तेज, 40 नई प्रजातियों को मिली अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा

CMS COP15: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के तहत Convention on the Conservation of Migratory Species of Wild Animals (CMS) की 15वीं Conference of the Parties (COP15) आज समाप्त हुई। ब्राजील के कैंपो ग्रांडे में 23 से 29 मार्च 2026 तक चली इस बैठक का थीम था – “Connecting Nature to sustain life”

CMS क्या है?

CMS (जिसे Bonn Convention भी कहा जाता है) 1979 में हस्ताक्षरित एक कानूनी रूप से बाध्यकारी वैश्विक संधि है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सीमाओं को पार करने वाली प्रवासी जंगली जानवरों (migratory species) और उनके आवासों का संरक्षण करना है। वर्तमान में 133 पार्टियां (132 देश + यूरोपीय संघ) इसमें शामिल हैं।

Appendix I: खतरे में पड़ी प्रवासी प्रजातियां (IUCN Red List पर Critically Endangered/Endangered) – शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध और सख्त संरक्षण।

Appendix II: ऐसी प्रजातियां जिनके संरक्षण की स्थिति अनुकूल नहीं है – अंतरराष्ट्रीय समझौतों की जरूरत।

भारत CMS का सक्रिय सदस्य है। वर्ष 2020 में भारत ने COP13 की मेजबानी की थी (थीम: “Migratory species connect the planet, and together we welcome them home!”) और तीन वर्षों तक CMS प्रेसिडेंसी संभाली थी। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, एशियाई हाथी, बंगाल फ्लोरिकन जैसी कई भारतीय प्रजातियां Appendix I में शामिल हैं।

COP15 के प्रमुख परिणाम

40 नई प्रवासी प्रजातियों को CMS Appendices में शामिल करने की मंजूरी। इनमें शार्क (जैसे hammerhead, thresher sharks), seabirds, giant otter, striped hyena, snowy owl आदि शामिल हैं। इससे इन प्रजातियों को मजबूत अंतरराष्ट्रीय संरक्षण मिलेगा।

Samarkand Strategic Plan (2024-2032) के कार्यान्वयन पर जोर, जिसमें migratory species को राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीतियों में शामिल करने का लक्ष्य है।

Concerted Actions को मंजूरी: sperm whale, giraffe, European eel, freshwater fish, cetaceans, flyways, seamount ecosystems आदि पर नए या जारी एक्शन प्लान।

Global Initiative on the Taking of Migratory Species (GTI) लॉन्च – अवैध और अस्थिर शिकार/उपयोग को रोकने के लिए। समुद्री कछुओं के लिए ‘blue corridors’, पक्षियों के लिए flyways, bycatch कम करने, underwater noise, vessel strikes, renewable energy impacts आदि पर प्रस्ताव पारित। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, बुनियादी ढांचा और गहरे समुद्र खनन (deep-sea mining) जैसे पार-सीमीय खतरों से निपटने के उपाय।

चिंताजनक आंकड़े (2026 Interim Report)

2024 की रिपोर्ट का अपडेट बताता है कि CMS-listed 1,189 प्रजातियों में से:

49% आबादियों में गिरावट (पिछले दो वर्षों में 44% से बढ़कर)।

24% विलुप्ति के खतरे में। 26 प्रजातियों की स्थिति बिगड़ी (जिनमें 18 migratory shorebirds शामिल), जबकि केवल 7 में सुधार। उत्तर भारतीय महासागर में शार्क-रे, भारतीय तटीय इलाकों में shorebirds, दक्षिण एशिया में वल्चर (धीरे-धीरे सुधार) प्रभावित।

मुख्य खतरे: आवास हानि, जलवायु परिवर्तन, अवैध शिकार, bycatch, प्रदूषण और बीमारियां (जैसे H5N1)।

UPSC प्रीलिम्स के लिए महत्व

पर्यावरण और जैव विविधता सेक्शन में CMS, Appendix I & II, COP की भूमिका, Samarkand Plan, India की COP13 मेजबानी महत्वपूर्ण टॉपिक हैं। Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework (GBF) से जुड़ाव। प्रवासी प्रजातियां राष्ट्रीय सीमाओं से परे होती हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग (transboundary cooperation) का उदाहरण।

भारतीय संदर्भ: Central Asian Flyway, Great Indian Bustard संरक्षण, vulture recovery आदि।

COP15 ने साबित किया कि प्रवासी प्रजातियां “Connecting Nature” का प्रतीक हैं। इनके संरक्षण से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ पहुंचता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब इन फैसलों को जमीन पर उतारने की चुनौती है, खासकर 2030 के GBF लक्ष्यों को पूरा करने के लिए। यह घटनाक्रम जैव विविधता संरक्षण में बहुपक्षीय सहयोग की जरूरत को रेखांकित करता है।

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