China’s patience is running out with attacks on CPEC in Pakistan: 20+ चीनी नागरिक शहीद, ‘स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट’ के बावजूद बीजिंग में भारी निराशा; बलूचिस्तान हमले ने बढ़ाई चिंता

China’s patience is running out with attacks on CPEC in Pakistan: पाकिस्तान में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की परियोजनाओं और चीनी नागरिकों पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के लगातार आतंकी हमलों ने बीजिंग को झकझोर कर रख दिया है। जनवरी-फरवरी 2026 में BLA के ‘हिरोफ 2.0’ नामक बड़े समन्वित हमलों में दर्जनों नागरिक और सुरक्षाकर्मी मारे गए, जबकि Gwadar पोर्ट और क्वेटा जैसे CPEC हॉटस्पॉट फिर निशाने पर आए। चीन ने सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान का समर्थन जताया, लेकिन चीनी मीडिया और विश्लेषकों में अब खुलकर ‘धैर्य जवाब दे रहा’ की बात हो रही है।

हमलों का पैटर्न और 2026 का नया दौर
पिछले पांच सालों में CPEC और BRI परियोजनाओं पर काम कर रहे कम से कम 20 चीनी नागरिक मारे जा चुके हैं, जबकि दर्जनों घायल हुए। हालिया हमले:
जनवरी-फरवरी 2026: BLA ने क्वेटा, ग्वादर, मस्तुंग, नोश्की, पसनी समेत 12 जिलों में समन्वित हमले किए—सुरक्षा चौकियों, बाजारों, स्कूलों, अस्पतालों और मजदूर कैंपों पर। 31 नागरिकों समेत 48 लोगों की मौत, 17 सुरक्षाकर्मी शहीद। पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई में 145+ BLA आतंकियों को मार गिराया। Gwadar में मजदूर कैंप पर हमला—महिलाएं और बच्चे भी शिकार बने।
इससे पहले: अक्टूबर 2024 में कराची एयरपोर्ट के पास चीनी काफिले पर हमला (2 चीनी मारे गए); मार्च 2024 में दासू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर 5 चीनी इंजीनियर मारे गए। BLA इन हमलों को ‘चीन-पाकिस्तान की लूट’ के खिलाफ बताता है। बलूच अलगाववादी CPEC को स्थानीय संसाधनों (तेल, गैस, खनिज) की लूट मानते हैं।

पाकिस्तान की कोशिशें: $260 मिलियन की स्पेशल यूनिट
जनवरी 2026: इंटीरियर मंत्री मोहसिन नकवी ने इस्लामाबाद में स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट (SPU) की घोषणा की—केवल चीनी नागरिकों और CPEC परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए। बजट करीब 260 मिलियन डॉलर। यूनिट इंटेलिजेंस, पेट्रोलिंग, एस्कॉर्ट, रैपिड रिस्पॉन्स और चीन के साथ जॉइंट काउंटर-टेरर ट्रेनिंग पर फोकस करेगी। पहले से ही बलूचिस्तान में आर्मी ब्रिगेड और सैकड़ों चेकपोस्ट तैनात, लेकिन हमले थमे नहीं। पाकिस्तान अक्सर इन हमलों के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराता है (‘फितना अल-हिंदुस्तान’ कहकर)।

बीजिंग की प्रतिक्रिया: सार्वजनिक समर्थन, निजी निराशा
• 3 फरवरी 2026: चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने हमलों की कड़ी निंदा की, शोक जताया और कहा, “चीन पाकिस्तान के साथ आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मजबूती से खड़ा है।” पाकिस्तान को ‘समर्थन’ का भरोसा दिया। दुर्लभ सख्त स्वर: “सुरक्षा चीनी नागरिकों की प्राथमिकता है, केवल सद्भावना से काम नहीं चलेगा।एक चीनी कमेंटेटर: “पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई बिना गैस की कार जैसी है—लोकप्रिय समर्थन और लॉजिस्टिक्स के बिना आगे नहीं बढ़ सकती। 2025 के अंत में कुछ CPEC प्रोजेक्ट्स धीमे पड़े, चीन ने ‘सुरक्षा’ को शर्त बनाया।

चीन की दुविधा:
• प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप से बचना चाहता है (आंतरिक मामला माना जाएगा)। लेकिन निवेश ($60 बिलियन CPEC) और नागरिकों की सुरक्षा जरूरी। इसलिए इंटेलिजेंस शेयरिंग, ड्रोन/सैटेलाइट सर्वेलेंस, ट्रेनिंग और उपकरण दे रहा।
• भारत कारक: CPEC को रणनीतिक रूप से भारत के खिलाफ ‘गेम-चेंजर’ मानता है, इसलिए पीछे नहीं हट रहा—हालांकि अब ‘लायबिलिटी’ (बोझ) बनता जा रहा।

निष्कर्ष: CPEC अब महंगा सौदा
चीनी विश्लेषक CPEC को ‘रेगिस्तान में ट्रक धक्का देने’ जैसा बता रहे—हर कदम खतरनाक। पाकिस्तान की सुरक्षा मशीनरी की ‘अक्षमता’ पर बीजिंग में गहरी निराशा, लेकिन ‘आयरन ब्रदर’ रिश्ता टूटने वाला नहीं लग रहा है। जनवरी 2026 में चीन-पाक जॉइंट स्टेटमेंट में ‘दृश्यमान और सत्यापनीय’ कदमों की मांग की गई। अगर हमले जारी रहे तो CPEC का भविष्य अनिश्चित। बलूचिस्तान की अस्थिरता न सिर्फ चीन-पाक गठबंधन, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा को भी चुनौती दे रही है।

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