China maintains its claim over Shaksgam Valley: चीन ने जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी पर अपना दावा फिर से दोहराया है और कहा है कि यह क्षेत्र पूरी तरह चीन का है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने भारत की आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि अपनी जमीन पर इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण करना पूरी तरह जायज है। यह बयान भारत के विदेश मंत्रालय के उस बयान के बाद आया है जिसमें शक्सगाम में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) संबंधी निर्माण को अवैध बताया गया था।

इसी बीच दिल्ली में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के एक उच्चस्तरीय दल ने भाजपा मुख्यालय का दौरा किया और वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। यह गलवान झड़प (2020) के बाद पहली उच्चस्तरीय पार्टी-टू-पार्टी मीटिंग है। दल का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय विभाग की उपमंत्री सुन हैयान कर रही थीं। मीटिंग में भाजपा की ओर से विदेश विभाग प्रभारी विजय चौथाईवाले और महासचिव अरुण सिंह मौजूद थे। चीनी राजदूत शू फेइहोंग भी शामिल हुए।
कांग्रेस का भाजपा पर हमला
कांग्रेस ने इस मीटिंग को लेकर भाजपा पर जोरदार हमला बोला है। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि जब चीन शक्सगाम घाटी पर दावा ठोक रहा है, लद्दाख में कब्जा जमाए बैठा है और अरुणाचल में गांव बसा रहा है, तब दिल्ली में भाजपा नेता चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से गले मिल रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि चीन को इतनी हिम्मत कैसे मिल रही है और मीडिया इस पर चुप क्यों है?
कांग्रेस ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करार दिया और पुराना मुद्दा भी उठाया कि 2020 में भाजपा ने कांग्रेस पर CCP से MoU साइन करने का आरोप लगाया था।
भाजपा का बचाव, RSS से भी मीटिंग
भाजपा ने मीटिंग को सामान्य अंतर-पार्टी संवाद बताया। विजय चौथाईवाले ने कहा कि चर्चा पार्टी स्तर पर संवाद बढ़ाने पर हुई। चीनी दल ने मंगलवार को RSS अधिकारियों से भी मुलाकात की, जो चीनी पक्ष की मांग पर हुई।
भारत ने 1963 के चीन-पाक सीमा समझौते को अवैध बताया है और शक्सगाम को अपना क्षेत्र मानता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-चीन संबंधों में थोड़ी नरमी के संकेत हैं, लेकिन सीमा विवाद और क्षेत्रीय दावे अभी भी तनाव का कारण बने हुए हैं। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

