Childhood Shouldn’t Retire: बुज़ुर्गों की सेहत और सम्मान के लिए MS धोनी का राष्ट्रीय आह्वान

Childhood Shouldn’t Retire: भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी एक बार फिर मैदान से बाहर एक अहम पारी खेलते नज़र आए, इस बार एक ऐसे अभियान के साथ, जो देश के बुज़ुर्गों की सेहत, ख़ुशी और सम्मान के लिए समर्पित है। 19 मार्च को MS धोनी ने गुजरात के वापी स्थित मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी मेरिल के वैश्विक मुख्यालय का अपना पहला दौरा किया। इस मौके पर उन्होंने “बचपना शुडन्ट रिटायर” विषय पर एक प्रेरणादायक और दिल को छूने वाली बातचीत की।

क्या है यह अभियान?
“बचपना शुडन्ट रिटायर” मेरिल के राष्ट्रव्यापी सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान “ट्रीटमेंट ज़रूरी है” की एक अहम कड़ी है, जिसे समय पर बीमारी की पहचान और उन्नत चिकित्सा उपचार तक पहुंच के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए शुरू किया गया था। यह नई पहल वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य पर विशेष रूप से केंद्रित है। अभियान यह बताता है कि जल्दी जांच, बचाव-आधारित स्क्रीनिंग और नवीन उपचार विकल्पों तक पहुंच से हृदय, अस्थि-रोग (ऑर्थोपेडिक) और उम्र से जुड़ी अन्य बीमारियों में परिणामों में काफी सुधार हो सकता है।

विज्ञापन फिल्म की कहानी — हेलीकॉप्टर शॉट और दादा-दादी
TBWA लिंटास द्वारा बनाई गई इस फिल्म में MS धोनी एक कोच की भूमिका में हैं। वे उत्साही दादा-दादियों के एक समूह को अपना प्रसिद्ध हेलीकॉप्टर शॉट सिखाते हैं, जो बच्चों के साथ एक दोस्ताना क्रिकेट मैच के लिए तैयारी कर रहे हैं। यह दृश्य न केवल हास्यपूर्ण है, बल्कि सशक्त भी है — और बुढ़ापे के बारे में पुरानी धारणाओं को पूरी तरह बदल देता है। ज़्यादातर स्वास्थ्य और बीमा विज्ञापन समय के बोझ तले दबा देते हैं, लेकिन यह फिल्म उल्टा करती है — बुज़ुर्ग खिलाड़ियों को सहानुभूति नहीं, बल्कि कोचिंग मिलती है और उन्हें मैदान में उतारा जाता है।

धोनी ने क्या कहा?
धोनी ने कहा, “मेरा हमेशा से मानना रहा है कि अपनी सेहत का ध्यान रखना सबसे ज़रूरी कामों में से एक है — अपने लिए और उन लोगों के लिए जो आपसे प्यार करते हैं। हम सबकी, खासकर नई पीढ़ी की, ज़िम्मेदारी है कि हमारे माता-पिता और दादा-दादी को वह देखभाल, ध्यान और सपोर्ट मिले जिसके वे हकदार हैं।”

भारत में बुज़ुर्गों की सेहत — चिंताजनक आँकड़े
अभियान की पृष्ठभूमि में भारत की स्वास्थ्य चुनौतियाँ भी उजागर होती हैं। ICMR और ग्लोबल बर्डन ऑफ डिज़ीज़ अध्ययनों के अनुसार, भारत में होने वाली सभी मौतों में से लगभग 28% हृदय रोगों के कारण होती हैं। इसके अलावा, NFHS-5 के अनुसार 24% से अधिक भारतीय वयस्क अधिक वजन या मोटापे के शिकार हैं। घुटने का ऑस्टियोआर्थराइटिस लगभग 4 में से 1 वयस्क को प्रभावित करता है, जो देश में विकलांगता का एक प्रमुख कारण बनता जा रहा है।

परिवारों से जुड़ाव का आह्वान
यह अभियान एक डिजिटल जन-आंदोलन के रूप में तैयार किया गया है, जो युवा भारतीयों को अपने दादा-दादी के साथ बचपन के खेल खेलने, कोई हॉबी साझा करने या रोज़मर्रा की खुशियों को कैद करने के लिए प्रेरित करता है। लोग अपनी यादें सोशल मीडिया पर “ट्रीटमेंट ज़रूरी है” के मंच के ज़रिये साझा कर सकते हैं। यह अभियान प्रिंट, टेलीविज़न, रेडियो, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक व्यापक मल्टी-चैनल रणनीति के ज़रिए फैलाया जाएगा।

संदेश साफ़ है
इस अभियान के केंद्र में एक सरल लेकिन शक्तिशाली विचार है — सक्रिय रहना उम्र से उतना नहीं, जितना नज़रिए से जुड़ा है। “बचपना शुडन्ट रिटायर” यह बताता है कि उत्साह, जिज्ञासा और खुशी कभी रिटायर नहीं होनी चाहिए। जैसे-जैसे भारत की आबादी बुज़ुर्ग होती जा रही है, यह अभियान एक ज़रूरी राष्ट्रीय संवाद की शुरुआत करता है — कि सुनहरे सालों को और भी सुनहरा बनाया जा सकता है, बशर्ते समय पर स्वास्थ्य देखभाल हो और परिवार साथ हो।​​​​​​​​​​​​​​​​

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