विशेषज्ञों ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला एक प्रमुख कैंसर है, लेकिन यह पूरी तरह रोका जा सकता है। HPV वैक्सीनेशन, नियमित स्क्रीनिंग और समय पर इलाज से इसे खत्म किया जा सकता है। सत्र में पारंपरिक पैप स्मीयर टेस्ट की तुलना में लिक्विड बेस्ड साइटोलॉजी (LBC) को ज्यादा सटीक और प्रभावी बताया गया।

LBC क्यों है बेहतर?
डॉ. प्रिया बंसल ने कहा, “पारंपरिक पैप स्मीयर की सटीकता करीब 60% होती है, जबकि LBC में यह 95% तक पहुंच जाती है। LBC में सैंपल लिक्विड मीडियम में लिया जाता है, जिससे कोशिकाएं बेहतर संरक्षित रहती हैं, कंटैमिनेशन कम होता है और असामान्य कोशिकाओं की पहचान आसान हो जाती है। इससे बार-बार टेस्ट की जरूरत कम पड़ती है और शुरुआती स्टेज में ही बीमारी पकड़ में आ जाती है।”
उन्होंने आगे बताया कि सटीक जांच से इलाज कम आक्रामक हो सकता है, फर्टिलिटी बरकरार रह सकती है और बड़ी सर्जरी या कीमोथेरेपी से बचा जा सकता है।
डॉ. वी. सीनू ने LBC को लंबे समय में कॉस्ट-इफेक्टिव बताया। “शुरुआती लागत थोड़ी ज्यादा हो सकती है, लेकिन उच्च सटीकता के कारण अतिरिक्त जांच और देर से इलाज का खर्च बच जाता है। इससे मरीजों पर आर्थिक और भावनात्मक बोझ दोनों कम होता है।”
देशभर में जागरूकता अभियान
इस महीने देशभर में कई अस्पताल और संस्थाएं सर्वाइकल कैंसर जागरूकता अभियान चला रहे हैं। मेदांता नोएडा का यह सत्र भी इसी कड़ी का हिस्सा है, जिसमें महिलाओं को HPV वैक्सीनेशन और नियमित स्क्रीनिंग की सलाह दी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि 30 से 50 वर्ष की महिलाओं को हर 3-5 साल में स्क्रीनिंग करानी चाहिए।
मेदांता हॉस्पिटल प्रशासन ने बताया कि आने वाले दिनों में भी ऐसे सत्र आयोजित किए जाएंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं जागरूक हो सकें और इस रोकथाम योग्य कैंसर से बचाव कर सकें।

