CBSE Board Exams 2026: सीबीएसई बोर्ड परीक्षाएं आज से शुरू हो गई हैं। पहले दिन कक्षा 10 के छात्रों ने गणित (स्टैंडर्ड और बेसिक) का पेपर दिया, जबकि कक्षा 12 में बायोटेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप, इंजीनियरिंग ग्राफिक्स और बिजनेस स्टडीज के पेपर हुए। देशभर में 43 लाख से ज्यादा छात्रों ने परीक्षा दी। परीक्षा एक ही शिफ्ट में सुबह 10:30 से दोपहर 1:30 बजे तक चली। गणित पेपर का विश्लेषण: शिक्षकों और छात्रों की शुरुआती प्रतिक्रियाओं के अनुसार, दोनों गणित (स्टैंडर्ड और बेसिक) पेपर मॉडरेट स्तर के रहे। पेपर एनसीईआरटी पर आधारित था, जिसमें बेसिक कॉन्सेप्ट्स और एप्लीकेशन-बेस्ड सवालों का अच्छा बैलेंस था। कई सवाल पिछले सालों के पैटर्न से मिलते-जुलते थे।
मैथ्स बेसिक पेपर: शिक्षकों ने इसे मॉडरेट बताया। एमसीक्यू लंबे और थोड़े ट्रिकी थे, लेकिन केस स्टडी आसान रहीं। सर्कल्स चैप्टर से एक सवाल खास तौर पर ट्रिकी था, जिसमें हायर-ऑर्डर थिंकिंग और प्रैक्टिकल एप्लीकेशन की जरूरत पड़ी। 5 अंकों वाले सेक्शन में ज्यादातर सवाल सीधे थे, लेकिन सर्कल्स वाला सवाल छात्रों को सोचने पर मजबूर कर गया। कुल मिलाकर पेपर बैलेंस्ड था, लेकिन लंबाई के कारण टाइम मैनेजमेंट जरूरी रहा।
मैथ्स स्टैंडर्ड पेपर: इसे भी ईजी टू मॉडरेट माना गया। सेक्शन ए में कॉन्सेप्चुअल क्लैरिटी जरूरी थी, एसर्शन-रीजन सवाल थोड़े ट्रिकी लगे। सेक्शन डी और ई (केस स्टडी) में गहराई से सोचने की जरूरत पड़ी, लेकिन ज्यादातर सवाल एनसीईआरटी से जुड़े और पिछले सालों से आसान थे। छात्रों ने कहा कि अच्छी तैयारी वाले ज्यादातर सवाल अटेम्प्ट कर पाए।
छात्रों की प्रतिक्रिया: कई छात्रों ने पेपर को “वेल-बैलेंस्ड और एनसीईआरटी-फोकस्ड” बताया, लेकिन कुछ ने लंबाई और कुछ ट्रिकी सवालों (खासकर सर्कल्स) की वजह से थोड़ी टेंशन बताई। शिक्षकों का कहना है कि अच्छे तैयारी वाले छात्रों के लिए यह स्कोरिंग रहा।
नई दो परीक्षा नीति पर विवाद: इस साल से लागू सीबीएसई की नई नीति के तहत कक्षा 10 के लिए साल में दो बोर्ड परीक्षाएं हैं—फरवरी में पहली (मैंडेटरी) और मई में दूसरी (इम्प्रूवमेंट या कंपार्टमेंट के लिए)। बेहतर स्कोर को काउंट किया जाएगा। लेकिन इस नीति ने छात्रों और अभिभावकों में कन्फ्यूजन बढ़ा दिया है। एक आर्टिकल में इसे “पॉलिसी कन्फ्यूजन” का नाम दिया गया है। पहली परीक्षा अनिवार्य है, अगर तीन से ज्यादा सब्जेक्ट्स मिस होते हैं तो “एसेंशियल रिपीट” कैटेगरी में आ जाते हैं। इम्प्रूवमेंट के लिए अलग-अलग कैटेगरी जैसे फर्स्ट चांस इम्प्रूवमेंट, एसेंशियल रिपीट आदि हैं। अभिभावक और छात्र कई सर्कुलर पढ़कर भी समझ नहीं पा रहे कि कौन सा अटेम्प्ट काउंट होगा, कितने सब्जेक्ट्स में इम्प्रूवमेंट संभव है।
एक दिल्ली की मां ने कहा, “पहले सिर्फ पढ़ाई की टेंशन थी, अब पॉलिसी समझने की भी हो गई है।” छात्रों ने इसे “सब्सक्रिप्शन मॉडल ऑफ स्ट्रेस” बताया—पहले 30 दिन की टेंशन अब 120 दिन की हो गई है। शिक्षक और काउंसलर कहते हैं कि सुधार का इरादा अच्छा है (स्ट्रेस कम करना), लेकिन कम्युनिकेशन और क्लैरिटी की कमी से छात्र “पॉलिसी लैब रैट्स” जैसा महसूस कर रहे हैं। सीबीएसई ने अफवाहों (पेपर लीक आदि) से बचने की अपील की है और कहा है कि प्रक्रिया सुरक्षित है। छात्रों को सलाह है कि फोकस पढ़ाई पर रखें, समय पर केंद्र पहुंचें और गाइडलाइंस फॉलो करें। आने वाले दिनों में बाकी सब्जेक्ट्स के पेपर होंगे। छात्रों को शुभकामनाएं!

