Caste controversy in films: हाल के दिनों में दो फिल्मों के नाम और कहानी को लेकर जातिगत संवेदनाओं से जुड़े विवाद ने बॉलीवुड और ओटीटी प्लेटफॉर्म को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। मनोज बाजपेयी अभिनीत नीरज पांडे की नेटफ्लिक्स फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ (Ghooskhor Pandit) का विवाद सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने के बाद मंगलवार (19 फरवरी) को समाप्त हो गया, जबकि दूसरी ओर छोटे बजट की फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ पर यादव समाज का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी विरोध प्रदर्शन किया है और फिल्म पर बैन की मांग की जा रही है।
‘घूसखोर पंडित’ विवाद का अंत
फरवरी की शुरुआत में रिलीज हुए टीजर के बाद ब्राह्मण समाज ने फिल्म के टाइटल पर तीखा विरोध जताया था। ‘पंडित’ जैसे पूज्य शब्द के साथ ‘घूसखोर’ जोड़ने को समुदाय की गरिमा पर हमला बताया गया। मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन हुए, थानों में शिकायतें दर्ज हुईं और जयपुर में तो जूता मारने वाले को 1 लाख रुपये इनाम देने की घोषणा भी की गई।
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां ब्राह्मण समाज की ओर से याचिका दायर की गई। 12 फरवरी को जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की बेंच ने नीरज पांडे और निर्माताओं को फटकार लगाते हुए कहा, “किसी समुदाय को नीचा दिखाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है। समाज में पहले से ही विभाजन है, इसे और बढ़ावा न दें।” कोर्ट ने टाइटल बदलने और आपत्तिजनक सामग्री हटाने के निर्देश दिए।
19 फरवरी को नीरज पांडे ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया कि पुराना टाइटल ‘घूसखोर पंडित’ पूरी तरह वापस ले लिया गया है, सभी टीजर, पोस्टर और प्रमोशनल सामग्री हटा दी गई है। नया टाइटल अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन यह पुराने जैसा नहीं होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि फिल्म किसी भी समुदाय, जाति या धर्म का अपमान नहीं करती। सुप्रीम कोर्ट ने मेकर्स के सकारात्मक रुख की सराहना की और सभी याचिकाएं खारिज कर विवाद को समाप्त घोषित कर दिया।
‘यादव जी की लव स्टोरी’ पर बवाल जारी
दूसरी फिल्म 27 फरवरी 2026 को थिएट्रिकल रिलीज के लिए तैयार है। इसमें प्रगति तिवारी (यूट्यूबर मृदुल तिवारी की बहन) मुख्य भूमिका में हैं। कहानी एक यादव परिवार की लड़की ‘सिंपल यादव’ की है, जिसे मुस्लिम युवक ‘वसीम खान’ (विशाल मोहन) से प्यार हो जाता है। ट्रेलर में डायलॉग “हमारी सिंपल के साथ लव जिहाद हो गया” सुनाई देता है। परिवार उसकी शादी ‘अभिमन्यु यादव’ (अंकित बड़ाना) से करवाना चाहता है, लेकिन धर्म और सामाजिक दबाव कहानी को जटिल बनाते हैं।
यादव समाज का आरोप है कि फिल्म यादव समुदाय को जानबूझकर टारगेट कर रही है, उनकी संस्कृति और इतिहास को गलत तरीके से दिखाया गया है तथा ‘लव जिहाद’ का प्रचार कर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश रची जा रही है। विरोधकर्ताओं ने कहा कि फिल्म की पूरी टीम (निर्देशक अंकित बड़ाना, प्रोड्यूसर संदीप तोमर) और मुख्य कलाकारों में कोई यादव नहीं है, इसलिए यह ‘टारगेटेड अटैक’ है।
संभल (उत्तर प्रदेश) में अरविंद यादव की शिकायत पर फिल्म के प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, प्रगति तिवारी और विशाल मोहन के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। फिरोजाबाद और संभल में पोस्टर जलाए गए, प्रदर्शन हुए और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बहजोई कलेक्ट्रेट पर मोर्चा खोला। यादव समाज ने सिनेमाघर मालिकों से फिल्म न दिखाने की अपील की और चेतावनी दी कि रिलीज नहीं होने देंगे।
मेकर्स और कलाकारों की सफाई
प्रगति तिवारी ने 19 फरवरी को इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर सफाई दी, “हमारा कोई इरादा किसी जाति, धर्म या समुदाय को ठेस पहुंचाने का नहीं है। फिल्म पूरी देखिए, फिर फैसला कीजिए। किसी बहन-बेटी को गलत नहीं दिखाया गया।” उनके भाई मृदुल तिवारी ने भी स्पष्ट किया कि वे फिल्म की राइटिंग या प्रोडक्शन से जुड़े नहीं हैं और सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करते हैं। सोशल मीडिया पर कलाकारों को धमकियां मिल रही हैं। विवाद के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या कला के क्षेत्र में जातिगत हस्तक्षेप बढ़ रहा है? एक तरफ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, दूसरी तरफ समुदायों की भावनाएं—यह बहस फिर गरमा गई है।
निष्कर्ष:
‘घूसखोर पंडित’ का मामला कोर्ट के हस्तक्षेप से सुलझ गया, लेकिन ‘यादव जी की लव स्टोरी’ पर तनाव जारी है। फिल्म उद्योग को अब सतर्क रहना होगा, ताकि रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक सद्भाव दोनों बरकरार रहें। दर्शक और समाज दोनों को फिल्म देखने के बाद ही राय बनाने का सुझाव दिया जा रहा है, लेकिन रिलीज से पहले का यह बवाल दिखाता है कि जाति-आधारित संवेदनाएं आज भी फिल्मों को आसानी से प्रभावित कर सकती हैं।

